मध्य प्रदेश के सतना जिले में सड़क दुर्घटनाओं में घायलों को समय पर जीवनरक्षक उपचार उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। भारत सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और मध्य प्रदेश शासन के संयुक्त दिशा-निर्देशों के अनुरूप संचालित 'पीएम-राहत योजना' के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर सतना जिला प्रशासन पूरी तरह सक्रिय है। इस क्रम में, योजना के बेहतर संचालन, दावा भुगतान प्रक्रिया में सरलीकरण और पात्र हितग्राहियों तक लाभ पहुँचाने के उद्देश्य से एक उच्चस्तरीय जिला स्तरीय समीक्षा बैठक एवं वीडियो कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया।
बैठक में प्रशासनिक और विभागीय अधिकारियों की भागीदारी
इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता सतना कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस द्वारा की गई। बैठक में जिला प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों के साथ-साथ स्वास्थ्य, परिवहन और एनआईसी (NIC) के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। इसमें मुख्य रूप से एसडीएम राहुल सिलड़िया, आरटीओ संजय श्रीवास्तव, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनोज शुक्ला, एनआईसी की मैनेजर श्रीमती परमीत कौर, आशुतोष पायासी, अभिषेक सिंह सहित संबंधित विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल हुए। बैठक का मुख्य एजेंडा सड़क दुर्घटना पीड़ितों को मिलने वाली सहायता को सुगम बनाना और शासन की इस जीवनरक्षक योजना का लाभ अंतिम व्यक्ति तक सुनिश्चित करना था।
योजना के मुख्य उद्देश्यों की समीक्षा
बैठक के दौरान सतना जिले में योजना के वर्तमान संचालन की गहन समीक्षा की गई। कलेक्टर ने बैठक में निम्न बिंदुओं पर विशेष ध्यान केंद्रित करने का निर्देश दिया:
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दुर्घटना पीड़ितों का त्वरित पंजीयन: दुर्घटना के तुरंत बाद घायलों का विवरण पोर्टल पर दर्ज करने की प्रक्रिया को और अधिक तीव्र बनाने की आवश्यकता जताई गई।
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उपचार की गुणवत्ता: यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए कि घायल को न केवल तत्काल, बल्कि सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो।
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क्लेम प्रक्रिया का सरलीकरण: दावा भुगतान (Claim Settlement) में आ रही तकनीकी बाधाओं को दूर करने और प्रक्रिया को पूरी तरह से पारदर्शी एवं सरल बनाने पर चर्चा की गई।
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विभागीय समन्वय: स्वास्थ्य विभाग, पुलिस और परिवहन विभाग के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता पर बल दिया गया ताकि फाइलें एक विभाग से दूसरे विभाग में अटकें नहीं।
कलेक्टर ने दिए सख्त निर्देश
बैठक में कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस ने स्पष्ट किया कि पीएम-राहत योजना केवल एक सरकारी दस्तावेजी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह एक जीवनरक्षक पहल है। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को निर्देशित किया कि:
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सड़क दुर्घटना में घायल प्रत्येक मरीज को शासन की मंशानुरूप 'गोल्डन ऑवर' के भीतर उपचार उपलब्ध कराया जाए।
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यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी पात्र हितग्राही जानकारी के अभाव या प्रक्रियात्मक त्रुटि के कारण लाभ से वंचित न रहे।
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दुर्घटना संबंधी प्रकरणों का समय पर पंजीयन, आवश्यक दस्तावेजों का विधिवत संधारण एवं भुगतान प्रक्रिया का त्वरित निष्पादन अनिवार्य है।
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अस्पताल स्तर पर नोडल अधिकारियों को सक्रिय रहने का निर्देश दिया गया ताकि मरीज के भर्ती होते ही योजना के लाभ मिलने शुरू हो जाएं।
पीएम-राहत योजना: एक जीवनरक्षक पहल
पीएम-राहत योजना का मुख्य उद्देश्य सड़क दुर्घटना के शिकार व्यक्तियों को चिकित्सा का भारी-भरकम खर्च उठाने के बोझ से मुक्त करना है। कई बार आर्थिक तंगी के कारण समय पर उपचार न मिल पाने से पीड़ितों की स्थिति बिगड़ जाती है। सतना जिला प्रशासन का यह प्रयास है कि जिले के हर नागरिक को यह सुरक्षा कवच प्राप्त हो। कलेक्टर ने यह भी कहा कि इस योजना का लाभ सतना के ग्रामीण अंचलों तक पहुँचाने के लिए जागरूकता अभियान भी चलाए जाएंगे।
भविष्य की कार्ययोजना और उम्मीदें
बैठक के समापन पर कलेक्टर ने एनआईसी के प्रतिनिधियों को निर्देश दिया कि तकनीकी समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर हल किया जाए। साथ ही, आरटीओ और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को प्रत्येक माह की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है। सतना जिले में इस समीक्षा बैठक के बाद उम्मीद है कि सड़क दुर्घटना के मामलों में उपचार की गति और गुणवत्ता में सुधार आएगा। शासन की इस मंशानुरूप सतना जिला प्रशासन एक संवेदनशील तंत्र बनाने के लिए प्रतिबद्ध है, जहाँ हर दुर्घटना पीड़ित को बिना किसी देरी के राहत मिल सके।
इस समीक्षा बैठक ने यह संदेश दिया है कि सतना जिला प्रशासन जनता की सुरक्षा और स्वास्थ्य के प्रति गंभीर है। योजना का प्रभावी क्रियान्वयन न केवल प्रशासनिक जवाबदेही है, बल्कि यह मानवीय संवेदना का भी प्रश्न है। आगामी दिनों में इस योजना का जमीनी असर देखने को मिलेगा।
image source : https://satna.mpinfo.org
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