मध्य प्रदेश के सतना जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने और भावी पीढ़ी को एक गंभीर व लाइलाज बीमारी से सुरक्षित रखने के लिए राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान का बिगुल बज चुका है। सतना जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित यह अभियान 28 जून से 30 जून तक पूरे जिले में संचालित किया जा रहा है। इस महाअभियान का मुख्य उद्देश्य शून्य से पांच वर्ष की आयु के प्रत्येक बच्चे को पोलियो की सुरक्षा चक्र प्रदान करना है। प्रशासन ने इस बार बेहद महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है, जिसके तहत जिले के 3 लाख 56 हजार 767 बच्चों को पोलियो की दवा पिलाने का कार्य किया जा रहा है।
अभियान का शुभारंभ और प्रशासनिक अपील
अभियान के सफल संचालन हेतु सतना कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस ने विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने जिले के समस्त अभिभावकों से भावुक और जिम्मेदार अपील की है कि वे अपने पांच वर्ष तक के बच्चों को नजदीकी टीकाकरण बूथ पर अवश्य लेकर आएं। कलेक्टर ने कहा कि पोलियो जैसी गंभीर बीमारी को जड़ से मिटाने के लिए जन-भागीदारी अत्यंत आवश्यक है और कोई भी बच्चा इस जीवन रक्षक दवा से वंचित न रहे, यह सुनिश्चित करना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।
अभियान की व्यापक तैयारियां और बुनियादी ढांचा
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. मनोज शुक्ला ने अभियान की तैयारियों के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि स्वास्थ्य विभाग ने जमीनी स्तर पर व्यापक तैयारियां पूरी कर ली हैं। अभियान को सुचारू रूप से चलाने के लिए जिले भर में 2826 पोलियो बूथ स्थापित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, यात्रियों और आवागमन वाले क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए 74 ट्रांजिट बूथ और 46 मोबाइल बूथों की व्यवस्था भी की गई है।
इस विशाल अभियान को सफल बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने 2966 विशेष टीमों का गठन किया है। इस टीम में कुल 5932 कार्यकर्ता और 295 पर्यवेक्षकों को तैनात किया गया है, जो अभियान के दौरान लगातार निगरानी रखेंगे। यह टीमें न केवल बूथ स्तर पर कार्य कर रही हैं, बल्कि उनकी कार्यप्रणाली में घर-घर दस्तक देना भी शामिल है।
अभियान की कार्ययोजना: तीन दिवसीय रणनीति
स्वास्थ्य विभाग ने पल्स पोलियो अभियान को तीन चरणों में विभाजित किया है ताकि शत-प्रतिशत बच्चों का टीकाकरण संभव हो सके:
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प्रथम दिवस (28 जून): अभियान के पहले दिन सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक सभी निर्धारित पोलियो बूथों पर बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाई जा रही है।
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द्वितीय एवं तृतीय दिवस (29-30 जून): इन दो दिनों में स्वास्थ्य विभाग की गठित टीमें घर-घर जाकर उन बच्चों की पहचान करेंगी जो पहले दिन किसी कारणवश बूथ पर नहीं पहुंच सके थे। इन छूटे हुए बच्चों को उनके आवास पर ही पोलियो की दवा दी जाएगी।
विशेष निगरानी और संवेदनशील क्षेत्रों पर फोकस
सतना जिला प्रशासन ने अभियान के दौरान कुछ संवेदनशील स्थानों पर विशेष ध्यान केंद्रित करने का निर्णय लिया है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. शुक्ला ने बताया कि बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और अन्य मुख्य आवागमन स्थलों पर विशेष निगरानी टीमें तैनात की गई हैं। इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि जो बच्चे बाहर से जिले में आ रहे हैं या यात्रा कर रहे हैं, उन्हें भी इस सुरक्षा चक्र से वंचित न रखा जाए।
इसके अलावा, जिले की झुग्गी-बस्तियों और ईंट भट्टों जैसे दुर्गम क्षेत्रों के लिए विशेष टीमों का गठन किया गया है। ये टीमें पहले दिन से ही सक्रिय होकर इन क्षेत्रों में घर-घर जाकर दवा पिलाने का कार्य कर रही हैं, ताकि कोई भी बच्चा टीकाकरण से न छूटे।
सतना के नागरिकों से सहयोग की अपील
स्वास्थ्य विभाग ने एक बार फिर अभिभावकों को सचेत और प्रेरित किया है। विभाग का कहना है कि पोलियो के खिलाफ यह लड़ाई मानवता की जीत है। सतना के समस्त नागरिकों से यह अपील की गई है कि वे अपने 0-5 वर्ष के सभी बच्चों को अनिवार्य रूप से नजदीकी पोलियो बूथ पर लेकर जाएं और इस राष्ट्रीय अभियान को सफल बनाने में अपना पूर्ण सहयोग दें।
जिले में स्थापित किए गए 2966 टीमों का कार्य केवल दवा पिलाना ही नहीं, बल्कि अभिभावकों को पोलियो के प्रति जागरूक करना भी है। सतना स्वास्थ्य विभाग द्वारा किए जा रहे इस प्रयास की प्रशंसा हर स्तर पर हो रही है। इस अभियान के सफल होने पर न केवल सतना जिला पोलियो मुक्त रहने के संकल्प को दोहराएगा, बल्कि यह अन्य जिलों के लिए भी एक आदर्श प्रस्तुत करेगा। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से आश्वस्त हैं कि निर्धारित समय-सीमा के भीतर जिले का लक्ष्य प्राप्त कर लिया जाएगा।
Image source : https://satna.mpinfo.org

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