मध्य प्रदेश के उमरिया जिले से विकास के दावों की पोल खोलती एक हैरान कर देने वाली तस्वीर सामने आई है। ग्राम पंचायत पठारी खुर्द के ग्राम गिलोथर में लाखों की लागत से बनी सड़कों का ऐसा हाल है कि अब यह समझ पाना मुश्किल हो गया है कि 'सड़क में गड्ढे हैं या गड्ढों में सड़क'। ग्रामीणों का आरोप है कि सरपंच चैनु अगरिया और सचिव दौलत प्रजापति की मनमानी और अनदेखी के चलते घटिया निर्माण किया गया, जिसके कारण आज स्थिति बद से बदतर हो चुकी है।
तस्वीरों में दिखाई दे रहा यह नजारा उमरिया जिले के ग्राम पंचायत पठारी खुर्द अंतर्गत आने वाले ग्राम गिलोथर का है। यहाँ हाल ही में दो सड़कों का निर्माण कराया गया था—एक सड़क ग्राम पंचायत के फंड से और दूसरी विधायक निधि से बनाई गई थी। लेकिन पहली ही बारिश ने इन सड़कों के निर्माण की असलियत सामने लाकर रख दी है।
घटिया निर्माण सामग्री और लापरवाही का आलम यह है कि पूरी सड़क दलदल और गहरे गड्ढों में तब्दील हो चुकी है। बारिश का पानी गड्ढों में भर जाने से आए दिन राहगीर और वाहन चालक हादसों का शिकार हो रहे हैं। स्कूली बच्चों से लेकर मरीजों तक को इस रास्ते से गुजरने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
वही स्थानीय ग्रामीणों का साफ तौर पर कहना है कि पंचायत स्तर पर हुए इस निर्माण में भारी अनियमितताएं बरती गई हैं। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि सरपंच चैनु अगरिया और सचिव दौलत प्रजापति की मिलीभगत और मनमानी के चलते निर्माण कार्य में गुणवत्ता का बिल्कुल ध्यान नहीं रखा गया। जनता के पैसों की बर्बादी कर भ्रष्टाचार का खुला खेल खेला गया है।
गिलोथर में बनी इन सड़कों की दुर्दशा ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सरकारी बजट की निगरानी करने वाले जिम्मेदार अधिकारी अब तक खामोश क्यों हैं? क्या प्रशासन इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कराकर दोषी सरपंच और सचिव पर सख्त कार्रवाई करेगा, या फिर गिलोथर के ग्रामीण यूं ही इन जानलेवा गड्ढों के सहारे चलने को मजबूर रहेंगे?
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