मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में नागरिकों की समस्याओं के त्वरित और संतोषजनक निराकरण को लेकर जिला प्रशासन ने अपनी कार्यशैली में और अधिक तेजी और पारदर्शिता लाने का निर्णय लिया है। सोमवार को कलेक्ट्रेट कार्यालय में आयोजित एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक में कलेक्टर श्री अंशुल गुप्ता ने जिले के विभिन्न विभागों में लंबित शिकायतों, आवेदनों और लंबित प्रकरणों की वर्तमान स्थिति का गहन परीक्षण किया। इस बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु 'ग्रेडिंग माह' के दौरान प्राप्त शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित करना था।
प्रशासन की प्राथमिकता: नागरिकों की संतुष्टि
बैठक को संबोधित करते हुए कलेक्टर श्री अंशुल गुप्ता ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि शासन की सबसे पहली प्राथमिकता नागरिकों की समस्याओं का समाधान करना है। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि शिकायतों के निराकरण में बरती गई लापरवाही कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि आवेदकों की समस्याओं का समाधान केवल कागजों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि धरातल पर उसका असर दिखाई देना चाहिए। नागरिकों की संतुष्टि ही किसी भी विभाग के कामकाज का वास्तविक मापदंड है।
विभागों द्वारा साप्ताहिक लक्ष्य का निर्धारण
विदिशा प्रशासन की इस बैठक की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता विभागों द्वारा स्वयं अपने लिए निर्धारित किए गए 'साप्ताहिक लक्ष्य' रहे। जिला अधिकारियों ने अपने-अपने विभागों में लंबित शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए आगामी सप्ताह के लिए निराकरण की एक निश्चित संख्या तय की है।
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जवाबदेही और प्रतिबद्धता: सभी विभागों के जिला अधिकारियों ने न केवल शिकायतों का ब्यौरा प्रस्तुत किया, बल्कि उन्हें निपटाने के लिए एक स्पष्ट 'लक्ष्य-आधारित कार्ययोजना' भी साझा की।
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प्रोत्साहन और दंड की नीति: कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि जो विभाग अपने निर्धारित साप्ताहिक लक्ष्यों को सफलतापूर्वक पूरा करेंगे, उन्हें प्रशासनिक स्तर पर प्रोत्साहित किया जाएगा। वहीं, यदि लक्ष्य पूर्ति में किसी भी प्रकार की लापरवाही या शिथिलता बरती जाती है, तो संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करते हुए उनके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
औपचारिकता नहीं, स्थायी समाधान की आवश्यकता
कलेक्टर श्री गुप्ता ने विभागीय अधिकारियों को यह स्पष्ट निर्देश दिए कि शिकायतों के निराकरण की प्रक्रिया में केवल औपचारिकता पूरी करने की प्रवृत्ति से बचें। उन्होंने कहा कि अक्सर देखा जाता है कि विभाग शिकायत को बंद करने के लिए कागजी खानापूर्ति कर देते हैं, लेकिन आवेदक की समस्या यथावत बनी रहती है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे आवेदकों की वास्तविक समस्याओं को समझें और उनका स्थायी समाधान सुनिश्चित करें ताकि एक ही शिकायत बार-बार न आए।
समन्वय और सक्रियता का मंत्र
विदिशा जिले की शिकायत निवारण व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए कलेक्टर ने सभी अधिकारियों से बेहतर समन्वय के साथ कार्य करने का आह्वान किया। कई बार देखा गया है कि एक विभाग की शिकायत दूसरे विभाग से संबंधित होने के कारण लंबित रहती है। इसे देखते हुए कलेक्टर ने अधिकारियों को आपसी तालमेल बिठाने और सक्रियता के साथ मामलों को निपटाने को कहा है। जिले के प्रशासनिक ढांचे को और अधिक जन-हितैषी बनाने के लिए यह बैठक एक मील का पत्थर साबित होगी।
निगरानी और समीक्षा प्रक्रिया
कलेक्टर ने यह भी स्पष्ट किया कि साप्ताहिक लक्ष्यों की नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी। इसके लिए एक व्यवस्थित रिपोर्टिंग तंत्र विकसित किया गया है। हर सप्ताह विभागवार प्रगति की समीक्षा होगी ताकि यह पता चल सके कि किस विभाग ने कितना कार्य किया और कहाँ सुधार की आवश्यकता है। यह निरंतर निगरानी व्यवस्था अधिकारियों को अपने कार्यों के प्रति अधिक सजग और सक्रिय बनाएगी।
निष्कर्ष
विदिशा जिले में ग्रेडिंग माह के अंतर्गत शिकायतों के निराकरण हेतु अपनाई गई यह कार्ययोजना निश्चित रूप से शासन की मंशा के अनुरूप है। कलेक्टर श्री अंशुल गुप्ता का यह रुख कि नागरिकों की समस्याएँ उनकी प्राथमिकता हैं, जिले में सुशासन के प्रति प्रशासन की गंभीरता को दर्शाता है। साप्ताहिक लक्ष्यों का निर्धारण और उन पर सख्त मॉनिटरिंग न केवल शिकायतों का निपटारा करेगी, बल्कि सरकारी तंत्र में जवाबदेही की संस्कृति को भी बढ़ावा देगी। अब विदिशा की जनता को उम्मीद है कि प्रशासन के इन प्रयासों से उनकी शिकायतों का जल्द और सही निवारण हो सकेगा, जिससे जिले के विकास कार्यों को और गति मिलेगी।
image source : https://vidisha.mpinfo.org

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