विदिशा जिले में शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं के धरातलीय क्रियान्वयन को अधिक सुदृढ़, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में जिला प्रशासन ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण एवं दूरदर्शी पहल की है। सोमवार, 27 जुलाई 2026 को आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान, विदिशा जिले के कलेक्टर श्री अंशुल गुप्ता ने जिला अधिकारियों के लंबित आवेदनों, विभागीय कार्यों और शासन की प्राथमिकता वाली योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की विस्तृत समीक्षा की। इस बैठक में कलेक्टर द्वारा लिए गए निर्णय के अनुसार, अब जिले के प्रत्येक जिला अधिकारी को एक-एक शासकीय स्कूल और एक-एक आंगनबाड़ी केंद्र की सीधी जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शासन की योजनाएं केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि उनका वास्तविक और प्रत्यक्ष लाभ समाज के अंतिम छोर पर खड़े पात्र व्यक्ति तक पूरी पारदर्शिता के साथ पहुंचे।

समीक्षा बैठक के मुख्य बिंदु और लंबित आवेदनों का निराकरण

सोमवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक की शुरुआत जिले के विभिन्न विभागों में लंबित पड़े आवेदनों की गहन समीक्षा के साथ हुई। कलेक्टर श्री अंशुल गुप्ता ने सभी विभागीय अधिकारियों को स्पष्ट और सख्त निर्देश दिए कि नागरिकों से प्राप्त होने वाले सभी लंबित आवेदनों का समय-सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण निराकरण किया जाए। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि आम जनता को अपने छोटे-छोटे कार्यों या शिकायतों के समाधान के लिए अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर न काटने पड़ें।

कलेक्टर ने समीक्षा के दौरान निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं पर विशेष निर्देश दिए:

  • समय-सीमा का कड़ाई से पालन: सभी विभाग अपने स्तर पर लंबित प्रकरणों की सूची तैयार करें और निर्धारित समयावधि के भीतर उनका शत-प्रतिशत निराकरण सुनिश्चित करें।

  • पारदर्शिता और जवाबदेही: प्रशासनिक कार्यों में किसी भी प्रकार की कोताही या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मैदानी स्तर पर अधिकारियों की सतत मॉनिटरिंग अनिवार्य होगी।

  • जनहित सर्वोपरि: प्रशासन का मुख्य उद्देश्य केवल कल्याणकारी योजनाएं संचालित करना मात्र नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक पात्र हितग्राही को उसका पूरा लाभ समय पर मिले।

  • विभागीय समन्वय: विभिन्न विभागों के बीच आपसी तालमेल को और अधिक बेहतर बनाया जाए ताकि विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की तकनीकी या प्रशासनिक बाधा उत्पन्न न हो।

जिला अधिकारियों द्वारा स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों का अनिवार्य निरीक्षण

कलेक्टर श्री अंशुल गुप्ता द्वारा दिए गए निर्देशों के तहत अब विदिशा जिले के प्रत्येक जिला स्तर के अधिकारी को एक शासकीय स्कूल और एक आंगनबाड़ी केंद्र गोद लेने या कहें कि उनकी नियमित निगरानी के लिए आवंटित किया गया है। इन संस्थानों के सुचारू संचालन और वहां मिलने वाली सुविधाओं की जमीनी हकीकत जानने के लिए अधिकारी नियमित अंतराल पर इन संस्थानों का भौतिक निरीक्षण करेंगे।

इस व्यवस्था के तहत निम्नलिखित व्यवस्थाओं और पहलुओं पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी:

  • शिक्षा की गुणवत्ता: स्कूलों में शिक्षण कार्य की नियमितता, शिक्षकों की उपस्थिति और बच्चों के सीखने के स्तर का आकलन करना।

  • पोषण एवं स्वास्थ्य: आंगनबाड़ी केंद्रों में गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और छोटे बच्चों को मिलने वाले पोषण आहार की गुणवत्ता की जांच करना।

  • स्वच्छता एवं आधारभूत सुविधाएं: स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में पेयजल की उपलब्धता, शौचालय की साफ-सफाई, बिजली और अन्य बुनियादी ढांचागत सुविधाओं की स्थिति देखना।

  • मध्यान्ह भोजन योजना (Mid-Day Meal): विद्यार्थियों को मिलने वाले मध्यान्ह भोजन की गुणवत्ता, साफ-सफाई और पोषण मानकों की नियमित जांच।

  • बच्चों की उपस्थिति: विद्यालयों और आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों की दैनिक उपस्थिति का रिकॉर्ड देखना और ड्रॉपआउट मामलों पर नियंत्रण पाना।

  • टीकाकरण और बाल विकास: महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत आने वाले टीकाकरण कार्यक्रमों, स्वास्थ्य जांच शिविरों और अन्य कल्याणकारी सेवाओं के क्रियान्वयन की वास्तविक स्थिति का आंकलन करना।

निरीक्षण के दौरान यदि किसी भी प्रकार की कमी या प्रशासनिक त्रुटि पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारी द्वारा उसका त्वरित निराकरण सुनिश्चित किया जाएगा, जिससे व्यवस्था में तुरंत सुधार हो सके। अधिकारियों को इन दौरों के बाद एक विस्तृत निरीक्षण प्रतिवेदन भी प्रस्तुत करना होगा।

आयुष्मान भारत योजना के क्रियान्वयन की विशेष समीक्षा

बैठक के दूसरे प्रमुख चरण में कलेक्टर श्री अंशुल गुप्ता ने देश और प्रदेश की एक बेहद महत्वपूर्ण और महत्वाकांक्षी स्वास्थ्य योजना—आयुष्मान भारत योजना के विदिशा जिले में अब तक के क्रियान्वयन कार्यों की गहन समीक्षा की। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देशित किया कि इस योजना के दायरे में आने वाले प्रत्येक पात्र हितग्राही का आयुष्मान कार्ड बनाया जाना सुनिश्चित किया जाए, ताकि किसी भी जरूरतमंद नागरिक को इलाज के अभाव में कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।

आयुष्मान योजना की समीक्षा के दौरान निम्नलिखित विशेष निर्देश दिए गए:

  • विशेष अभियान का संचालन: जिले में छूटे हुए सभी पात्र हितग्राहियों के आयुष्मान कार्ड बनवाने के लिए विशेष अभियान चलाए जाएं, ताकि शत-प्रतिशत लक्ष्य को समयबद्ध रूप से प्राप्त किया जा सके।

  • वरिष्ठ नागरिकों पर विशेष फोकस: विशेष रूप से 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के सभी वरिष्ठ नागरिकों के आयुष्मान कार्ड बनाने की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए, ताकि इस आयु वर्ग के लोगों को स्वास्थ्य सुरक्षा का पूरा लाभ मिल सके।

  • आपसी समन्वय: स्वास्थ्य विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, नगरीय निकाय तथा अन्य संबंधित महकमे आपसी समन्वय के साथ कार्य करें ताकि मैदानी स्तर पर कोई भी पात्र व्यक्ति इस योजना के लाभ से वंचित न रहे।

  • सुलभ और त्वरित प्रक्रिया: कार्ड बनवाने की प्रक्रिया को आम जनता के लिए जितना संभव हो सके उतना सरल बनाया जाए ताकि शिविरों या कॉमन सर्विस सेंटर्स पर हितग्राहियों को किसी असुविधा का सामना न करना पड़े।

निष्कर्ष और प्रशासनिक चेतावनी

बैठक के अंत में कलेक्टर श्री अंशुल गुप्ता ने सभी जिला अधिकारियों को चेतावनी भरे लहजे में यह भी निर्देशित किया कि जनहित से जुड़े कार्यों और शासन की प्राथमिकताओं में किसी भी स्तर पर लापरवाही या उदासीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि विदिशा जिले के प्रत्येक नागरिक तक शासन की योजनाओं का लाभ सुगमता से पहुंचे, यही जिला प्रशासन की सबसे बड़ी प्रतिबद्धता है। स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्रों की निगरानी की यह नई व्यवस्था न केवल विभागों के बीच आपसी समन्वय को मजबूत करेगी, बल्कि प्रशासनिक कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही को भी एक नए आयाम पर ले जाएगी।

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