विदिशा जिले में आने वाले मानसून सत्र और संभावित जल-आपदाओं को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह से सतर्क हो गया है। इसी क्रम में, होमगार्ड, नागरिक सुरक्षा एवं आपदा प्रबंधन मुख्यालय, मध्य प्रदेश, भोपाल के दिशा-निर्देशों के अनुरूप विदिशा जिले में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। बंगला घाट स्थित बेतवा नदी के तट पर 29 जून से प्रारंभ हुआ यह प्रशिक्षण कार्यक्रम जिले की आपदा प्रबंधन क्षमताओं को नई मजबूती प्रदान कर रहा है। इसमें होमगार्ड और एसडीईआरएफ (SDERF) के 40 कुशल जवान भाग ले रहे हैं। इस प्रशिक्षण का प्राथमिक उद्देश्य आपदा की स्थिति में त्वरित, प्रभावी और सुरक्षित बचाव कार्यों के लिए जवानों को व्यावहारिक रूप से दक्ष बनाना है।

प्रशिक्षण का उद्देश्य और महत्व

आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में प्रशिक्षण की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है, विशेषकर तब जब बात बाढ़, नदी में डूबने की घटनाओं या जलभराव जैसे संकटों की हो। विदिशा कलेक्टर के मार्गदर्शन में संचालित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य लक्ष्य जवानों को हर प्रकार की कठिन परिस्थिति के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार करना है। प्रशिक्षण के दौरान न केवल बचाव तकनीकों पर ध्यान दिया जा रहा है, बल्कि टीम वर्क, धैर्य और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता को भी विकसित किया जा रहा है।

विदिशा जिला, जो भौगोलिक रूप से बेतवा और उसकी सहायक नदियों के किनारे स्थित है, मानसून के दौरान कई बार जल संकट का सामना करता है। ऐसे में, यह प्रशिक्षण कार्यक्रम स्थानीय निवासियों की सुरक्षा के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह कार्य करेगा।

प्रशिक्षण का तीसरा दिन: रेस्क्यू की बारीकियों का प्रदर्शन

प्रशिक्षण के तीसरे दिन प्रशिक्षकों द्वारा जल-आपदाओं के दौरान अपनाई जाने वाली बचाव तकनीकों पर विशेष जोर दिया गया। इस दिन जवानों को निम्नलिखित महत्वपूर्ण पहलुओं का गहन प्रशिक्षण दिया गया:

  • जल आपदाओं का विश्लेषण: जवानों को सिखाया गया कि किस प्रकार से नदी के उफान और जलभराव की स्थिति में रेस्क्यू कार्य किए जाते हैं।

  • आधुनिक उपकरणों का उपयोग: बचाव कार्यों में उपयोग होने वाली रस्सियों, लाइफ जैकेट, नाव और अन्य तकनीकी उपकरणों के संचालन की बारीकियां समझाई गईं।

  • सुरक्षा मानक: बचाव कार्य के दौरान स्वयं की सुरक्षा और पीड़ित की सुरक्षा के लिए किन अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन करना चाहिए, इस पर विस्तृत व्याख्यान और अभ्यास हुआ।

  • प्राथमिक उपचार: बचाव के बाद पीड़ित को तुरंत दी जाने वाली प्राथमिक चिकित्सा की जानकारी दी गई।

व्यापक मॉक ड्रिल: विदिशा आपदा तंत्र की तैयारी

प्रशिक्षण के दौरान आयोजित की गई व्यापक मॉक ड्रिल इस कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा रही। प्लाटून कमांडर रश्मि दुबे के नेतृत्व में जवानों ने उन आपदा स्थितियों का सजीव प्रदर्शन किया जो अक्सर मानसून के दौरान उत्पन्न होती हैं। इस ड्रिल की मुख्य विशेषताएं थीं:

  1. नाव पलटने की स्थिति: एक सजीव अभ्यास में यह दिखाया गया कि यदि नदी के बीच नाव पलट जाए, तो जवानों को कितनी फुर्ती से वहां पहुंचना है और डूबते हुए व्यक्तियों को कैसे बाहर निकालना है।

  2. टापू से रेस्क्यू: नदी के बीच में बने टापू पर फंसे हुए लोगों को निकालने का सफल प्रदर्शन किया गया, जिसमें जवानों की समन्वित शक्ति दिखाई दी।

  3. डीप डाइविंग: पानी की गहराई में जाकर खोज और बचाव कार्य (Search and Rescue) करने की दक्षता का प्रदर्शन किया गया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि एसडीईआरएफ के जवान कितनी गहरी चुनौतियों का सामना करने में सक्षम हैं।

इन अभ्यासों के माध्यम से यह सुनिश्चित किया गया कि वास्तविक संकट के समय जवान बिना किसी घबराहट के अपने कर्तव्यों का पालन कर सकें।

अधिकारियों का अवलोकन और निर्देश

मॉक ड्रिल के दौरान जिले के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, जिनमें अपर कलेक्टर श्री अनिल डामोर और एसडीएम श्री क्षितिज शर्मा प्रमुख रूप से उपस्थित थे, ने पूरी गतिविधियों का बारीकी से अवलोकन किया। अधिकारियों ने न केवल प्रशिक्षण गतिविधियों को देखा, बल्कि आपदा प्रबंधन के लिए उपलब्ध संसाधनों और आधुनिक उपकरणों की वर्तमान स्थिति का भी जायजा लिया।

अपर कलेक्टर श्री अनिल डामोर ने कहा कि विदिशा प्रशासन किसी भी प्रकार की आपदा से निपटने के लिए पूर्णतः तैयार है। उन्होंने जवानों के उत्साह की सराहना करते हुए कहा कि प्रशिक्षण के दौरान सीखी गई बातें वास्तविक समय में लोगों की जान बचाने में मील का पत्थर साबित होंगी। एसडीएम श्री क्षितिज शर्मा ने भी जवानों की त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता की प्रशंसा की और उन्हें निर्देश दिए कि वे बचाव कार्यों में तकनीकी दक्षता के साथ-साथ मानवता को भी प्राथमिकता दें।

भविष्य की तैयारी और सुरक्षा तंत्र का सुदृढ़ीकरण

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का दीर्घकालिक उद्देश्य विदिशा जिले के आपदा प्रबंधन तंत्र को और अधिक मजबूत बनाना है। आपातकालीन स्थितियों में समय का महत्व सबसे अधिक होता है, और यह प्रशिक्षण जवानों को कम से कम समय में अधिकतम परिणाम प्राप्त करने के लिए तैयार कर रहा है।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी इस प्रकार के प्रशिक्षण आयोजित किए जाएंगे ताकि जवानों की क्षमता में निरंतर वृद्धि हो सके। विदिशा की आम जनता को भी यह विश्वास दिलाया गया है कि यदि किसी भी प्रकार का जल संकट उत्पन्न होता है, तो जिले के होमगार्ड और एसडीईआरएफ के जवान पूरी मुस्तैदी और कुशलता के साथ उनकी सुरक्षा के लिए तैनात रहेंगे।

निष्कर्ष

विदिशा जिले में बंगला घाट पर चल रहा यह विशेष प्रशिक्षण और मॉक ड्रिल आपदा प्रबंधन के प्रति जिले की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। एक सशक्त आपदा प्रबंधन तंत्र ही आपदाओं के प्रभाव को कम कर सकता है। जिस प्रकार से जवानों ने अपनी दक्षता, साहस और समन्वय का प्रदर्शन किया है, वह निश्चित रूप से सराहनीय है। यह प्रशिक्षण न केवल आपदाओं से लड़ने की शक्ति प्रदान करता है, बल्कि जिले के हर नागरिक को एक सुरक्षित वातावरण का भरोसा भी दिलाता है।

image source : https://vidisha.mpinfo.org