विदिशा जिले में शासन की प्राथमिकताओं और जनहितकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर कलेक्टर श्री अंशुल गुप्ता ने कलेक्ट्रेट के बेतवा सभागार में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य पिछले एक सप्ताह में विभिन्न विभागों द्वारा लंबित आवेदनों पर की गई कार्रवाई की समीक्षा करना और प्रशासनिक कार्यों में गति लाना था। कलेक्टर ने स्पष्ट रूप से निर्देशित किया कि जिले की प्रदेश स्तरीय रैंकिंग सुधारने और आम नागरिकों को राहत पहुंचाने के लिए कार्यशैली में बदलाव और संवेदनशीलता अनिवार्य है।
सीएम हेल्पलाइन: 14,488 शिकायतों के निराकरण का लक्ष्य
समीक्षा के दौरान सीएम हेल्पलाइन से जुड़े आंकड़ों पर विस्तार से चर्चा हुई। जिले में इस माह कुल 14,488 शिकायतों का समय-सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण निराकरण करना एक बड़ी चुनौती और प्राथमिकता है। कलेक्टर श्री गुप्ता ने अधिकारियों को चेताया कि शिकायतों के निराकरण में केवल खानापूर्ति न की जाए, बल्कि शिकायतकर्ता को संतुष्टिपूर्ण समाधान मिले। उन्होंने जोर दिया कि निराकरण की गुणवत्ता से ही जिले की रैंकिंग में सुधार संभव है।
जनसुनवाई और वरिष्ठ कार्यालयों के लंबित प्रकरण
कलेक्टर ने जनसुनवाई में प्राप्त आवेदनों को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि ऐसे आवेदनों का प्राथमिकता के आधार पर निराकरण किया जाना चाहिए। उन्होंने प्रत्येक लंबित प्रकरण की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जनसुनवाई के माध्यम से सीधे तौर पर जनता से जुड़ी समस्याओं का समाधान करना जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है, इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
नल-जल योजनाएं और पेयजल व्यवस्था पर विशेष ध्यान
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHS) की समीक्षा के दौरान, बंद पड़ी नल-जल योजनाओं को लेकर कलेक्टर ने अपनी गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करना विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है। जहां भी तकनीकी या प्रशासनिक बाधाएं आ रही हैं, उनका तत्काल समाधान किया जाए। कलेक्टर ने स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों और गौशालाओं में स्थापित हैंडपंपों के नियमित निरीक्षण और उनके रखरखाव के निर्देश दिए, ताकि कहीं भी पेयजल व्यवस्था बाधित न हो।
श्रमिक हितैषी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन
बैठक में श्रम विभाग की कार्यप्रणाली की भी समीक्षा की गई। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि निर्माण विभागों और श्रम विभाग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए एक पृथक बैठक आयोजित की जाए। इसका उद्देश्य श्रमिक वर्ग के लिए संचालित शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ उन तक प्रभावी तरीके से पहुँचाना है।
अन्य विभागों की कार्ययोजना और निर्देश
बैठक में शिक्षा, स्वास्थ्य, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, महिला एवं बाल विकास, कृषि, जल निगम तथा आईटीआई जैसे महत्वपूर्ण विभागों के कामकाज की समीक्षा की गई। कलेक्टर ने सभी विभागीय अधिकारियों को निम्नलिखित निर्देश दिए:
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लक्ष्य की प्राप्ति: सभी विभागीय योजनाओं के निर्धारित लक्ष्यों को समय-सीमा के भीतर पूर्ण किया जाए।
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संवेदनशीलता: जनहित से जुड़े मामलों में अधिकारी विशेष संवेदनशीलता बरतें।
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अनिवार्य उपस्थिति: जिला मुख्यालय पर आयोजित होने वाली टीएल बैठकों में अब सभी नगरीय एवं ग्रामीण निकायों के अधिकारियों की प्रत्यक्ष उपस्थिति अनिवार्य कर दी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विभागीय समन्वय और त्वरित निर्णय के लिए अधिकारियों का आमने-सामने होना आवश्यक है।
सहभागिता और समन्वय
इस महत्वपूर्ण बैठक में अपर कलेक्टर श्री अनिल कुमार डामोर, जिला पंचायत सीईओ श्री ओ.पी. सनोडिया और संयुक्त कलेक्टर सुश्री निकिता तिवारी सहित जिले के तमाम आला अधिकारी मौजूद रहे। वहीं, विकासखंड स्तरीय अधिकारियों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में जुड़कर अपने-अपने क्षेत्रों की स्थिति से अवगत कराया। कलेक्टर श्री गुप्ता के इन सख्त निर्देशों से स्पष्ट है कि विदिशा प्रशासन अब लंबित प्रकरणों के शून्य स्तर पर लाने की दिशा में ठोस कदम उठाने को तैयार है।
image source : https://vidisha.mpinfo.org

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