विदिशा जिले में शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं और आम नागरिकों के लंबित आवेदनों के प्रति जिला प्रशासन पूरी तरह सक्रिय नजर आ रहा है। इसी क्रम में कलेक्टर श्री अंशुल गुप्ता की अध्यक्षता में एक अत्यंत महत्वपूर्ण साप्ताहिक समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य विभिन्न विभागों में लंबित प्रकरणों की स्थिति की समीक्षा करना और विकास कार्यों की गति को तेज करना था। बैठक में न केवल लंबित मामलों पर चर्चा की गई, बल्कि आने वाले समय के लिए कार्ययोजनाएं भी तैयार की गईं।

विदिशा में प्रशासन की कार्यशैली और विकास कार्यों की गहन समीक्षा

कलेक्टर श्री अंशुल गुप्ता ने बैठक की शुरुआत में स्पष्ट कर दिया कि जनहित से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या उदासीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने सभी विभागीय अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि शासन की प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए अपने-अपने विभागों के लंबित प्रकरणों का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित करें।

बैठक में 'टाइम लिमिट' (TL) के अंतर्गत आने वाले आवेदनों की बारीकी से समीक्षा की गई। कलेक्टर ने पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन (PPT) के माध्यम से विभागवार प्रगति का आकलन किया। मुख्यमंत्री मॉनिटरिंग के प्रकरणों के साथ-साथ माननीय केंद्रीय मंत्री एवं प्रभारी मंत्री से प्राप्त पत्रों पर की गई कार्रवाई का विवरण भी मांगा गया। यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए कि जन प्रतिनिधियों से प्राप्त पत्रों का समय पर न केवल निराकरण हो, बल्कि उसका उत्तर भी संबंधित को समय सीमा में भेजा जाए।

विदिशा में शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं पर विशेष जोर

बैठक के दौरान जिले की शिक्षण संस्थाओं और छात्र-छात्राओं के भविष्य से जुड़े विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।

  • प्रवेश प्रक्रिया: जिले के समस्त स्कूलों, छात्रावासों और आईटीआई (ITI) में चल रही प्रवेश प्रक्रिया की प्रगति का परीक्षण किया गया। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि कोई भी पात्र विद्यार्थी शिक्षा से वंचित न रहे, यह सुनिश्चित किया जाए। प्रवेश प्रक्रिया को शत-प्रतिशत पूर्ण करने के लिए अधिकारियों को जमीनी स्तर पर निगरानी रखने को कहा गया।

  • नल-जल योजना: ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में जल जीवन मिशन के अंतर्गत संचालित कार्यों की समीक्षा की गई। कलेक्टर ने बंद पड़ी नल-जल योजनाओं को तुरंत प्रभाव से चालू करने और जो योजनाएं पूर्ण हो चुकी हैं, उन्हें संबंधित ग्राम पंचायतों या विभागों को हैंडओवर करने के निर्देश दिए।

  • राशन और केवाईसी (Re-KYC): उचित मूल्य दुकानों पर की गई कार्रवाई की समीक्षा करते हुए राशन कार्ड धारकों की ई-केवाईसी प्रक्रिया में तेजी लाने पर जोर दिया गया, ताकि पात्र हितग्राहियों को राशन मिलने में कोई असुविधा न हो।

विदिशा में जल संरक्षण और पर्यावरणीय सुरक्षा की कवायद

राज्य शासन के 'जल गंगा संवर्धन अभियान' को विदिशा जिले में प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए गए। कलेक्टर ने वर्षा जल संचयन के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि जिले के सभी जल स्रोतों के पुनर्जीवन और संवर्धन का कार्य प्राथमिकता पर किया जाए।

इसके साथ ही, मानसून के दौरान जलभराव की समस्या को रोकने के लिए नगर पालिका और ग्रामीण विकास विभाग को पूर्व तैयारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। नालों की सफाई और जल निकासी के उचित प्रबंध समय रहते पूरे करने को कहा गया है। जिले में चल रहे सघन पौधारोपण अभियान और पूर्व में लगाए गए पौधों के रखरखाव (Maintenance) की भी कड़ी समीक्षा की गई।

विदिशा प्रशासन का 'ज़ीरो पेंडेंसी' पर फोकस

प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने के उद्देश्य से कलेक्टर ने राजस्व एवं कृषि विभाग से संबंधित महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर गहन मंथन किया:

  1. राजस्व मामले: अविवादित नामांतरण (180 दिवस के भीतर), बंटवारा (45 दिवस के भीतर) एवं सीमांकन (90 दिवस के भीतर) के लंबित मामलों को तय समय सीमा के अंदर निपटाने के सख्त निर्देश दिए गए।

  2. अतिक्रमण: जिले में शासकीय भूमि और भवनों पर विभागवार अतिक्रमण की स्थिति की समीक्षा की गई। कलेक्टर ने अतिक्रमण हटाने के लिए त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश दिए ताकि सरकारी संपत्ति का उपयोग जनहित में हो सके।

  3. कृषि कार्य: खरीफ सीजन की तैयारियों के अंतर्गत, किसानों को मूंग के स्थान पर उड़द की खेती के लिए प्रोत्साहित करने पर चर्चा हुई। साथ ही, नरवाई जलाने की रोकथाम के लिए ग्रामवार कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए।

  4. स्वरोजगार: प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के तहत बैंक स्तर पर लंबित ऋण आवेदनों को जल्द से जल्द स्वीकृत कराने के लिए कहा गया, ताकि स्थानीय कारीगर और उद्यमी लाभान्वित हो सकें।

कलेक्टर के निर्देश: अधिकारी जवाबदेही सुनिश्चित करें

कलेक्टर श्री अंशुल गुप्ता ने जिला स्तरीय अधिकारियों से अपेक्षा की कि वे नियमित रूप से मैदानी निरीक्षण करें। प्रत्येक अधिकारी को कम से कम एक या दो आंगनबाड़ी केंद्रों और एक विद्यालय का दौरा कर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने कहा कि केवल कागजी कार्रवाई काफी नहीं है, बल्कि कार्यों की गुणवत्ता का धरातल पर दिखना अनिवार्य है।

बैठक के अंत में उन्होंने स्पष्ट किया कि लंबित आवेदनों का निराकरण ही शासन की सक्रियता का पैमाना है। अधिकारियों को टीम भावना के साथ काम करने और समन्वय बनाकर जनसमस्याओं का समाधान करने के लिए प्रेरित किया गया। आगामी समीक्षा बैठक में इन सभी निर्देशों के पालन प्रतिवेदन की पुनः समीक्षा की जाएगी। विदिशा जिला प्रशासन का यह प्रयास है कि आम जनता को सरकारी दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें और उन्हें समय पर न्याय व सेवाएं प्राप्त हों।

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