आमला। शहर में मुख्यमंत्री अधोसंरचना विकास योजना के अंतर्गत चंद्रभागा नदी से बस स्टैंड तक बनाए जा रहे डिवाइडर एवं सेंटर लाइट निर्माण कार्य में अनियमितताओं का मामला लगातार गहराता जा रहा है। लाखों रुपये की इस महत्वाकांक्षी परियोजना में पहले डिवाइडर निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठे और अब सेंटर लाइट के लिए लगाए गए पोल भी निर्धारित तकनीकी मानकों से कम पाए जाने का मामला सामने आया है। सबसे हैरानी की बात यह है कि नगर पालिका की तकनीकी जांच रिपोर्ट में पोल निर्धारित मानक से कम होने का उल्लेख किए जाने के बावजूद आज तक न तो संबंधित पोल हटाए गए, न बदले गए और न ही निर्माण एजेंसी के खिलाफ किसी प्रकार की कार्रवाई की गई। इससे पूरे मामले में नगर पालिका की कार्यप्रणाली और निर्माण एजेंसी को मिल रहे संरक्षण पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जानकारी के अनुसार इस निर्माण कार्य का ठेका रुद्र कंस्ट्रक्शन को दिया गया है। कुछ समय पहले निर्माणाधीन डिवाइडर की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें सामने आने पर तत्कालीन मुलताई नगर पालिका में पदस्थ एवं वर्तमान में नगर पालिका आमला के उपयंत्री योगेश आनेराव को तकनीकी जांच सौंपी गई थी। जांच के दौरान निर्माण कार्य में कई तकनीकी कमियां उजागर हुईं, जिसके बाद परियोजना की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए।
*गुणवत्ताहीन मिला डिवाइडर, तोड़कर दोबारा बनाने के दिए गए थे निर्देश*
उपयंत्री की जांच रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया कि डिवाइडर निर्माण निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप नहीं किया गया है। रिपोर्ट के आधार पर नगर पालिका ने निर्माण एजेंसी को डिवाइडर तोड़कर दोबारा बनाने के निर्देश दिए। एजेंसी ने पुराने डिवाइडर को तो तोड़ दिया, लेकिन कई सप्ताह बीत जाने के बाद भी नया निर्माण पूरा नहीं हो सका है। अधूरा निर्माण लोगों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है और परियोजना की प्रगति पर भी प्रश्नचिह्न लगा हुआ है।
*9 मीटर की जगह 8.9 मीटर के मिले पोल*
डिवाइडर के साथ-साथ सेंटर लाइट के लिए लगाए गए पोलों की भी तकनीकी जांच की गई। जांच रिपोर्ट के अनुसार परियोजना की डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) में 9 मीटर लंबे पोल लगाने का स्पष्ट प्रावधान है, जबकि मौके पर लगाए गए पोल 8.9 मीटर लंबे पाए गए।
विशेषज्ञों के अनुसार सरकारी निर्माण कार्यों में डीपीआर एवं अनुबंध की शर्तों का अक्षरशः पालन अनिवार्य होता है। निर्धारित मानक से कम माप के पोल लगाना तकनीकी नियमों के उल्लंघन की श्रेणी में आता है, चाहे अंतर कुछ सेंटीमीटर का ही क्यों न हो।
*रिपोर्ट के बाद भी जस के तस खड़े हैं पोल*
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब नगर पालिका के उपयंत्री ने अपनी जांच रिपोर्ट में पोल की लंबाई कम होने का उल्लेख किया, तब भी आज तक संबंधित पोलों को हटाया या बदला क्यों नहीं गया? यदि बाद में दोबारा माप कर पोल सही पाए गए थे, तो उसकी कोई स्वतंत्र तकनीकी रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की गई? वहीं यदि पहली जांच सही थी, तो निर्माण एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
इन सवालों के जवाब अभी तक सामने नहीं आए हैं, जिससे पूरे मामले की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।
*क्या ठेकेदार को बचाया जा रहा है?*
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि कोई आम व्यक्ति भवन निर्माण में निर्धारित मानकों का उल्लंघन करता है तो नगर पालिका तत्काल नोटिस जारी कर कार्रवाई करती है। लेकिन जब सरकारी परियोजना में तकनीकी जांच के बाद भी निर्माण एजेंसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती, तो यह दोहरे मापदंड को दर्शाता है।
लोगों का कहना है कि यदि जांच रिपोर्ट केवल फाइलों तक सीमित रह जाए और उसके आधार पर कोई निर्णय ही न लिया जाए, तो तकनीकी जांच कराने का औचित्य ही समाप्त हो जाता है। नागरिकों ने पूरे मामले की स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय जांच कराने तथा दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
*पारदर्शिता पर भी उठे सवाल*
नगर पालिका द्वारा अब तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि यदि पहली तकनीकी जांच में कमियां मिली थीं तो बाद में उन कमियों को किस आधार पर सही माना गया। इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिर परियोजना की गुणवत्ता की अंतिम जिम्मेदारी किसकी है और सार्वजनिक धन से हो रहे निर्माण कार्यों की जवाबदेही कौन तय करेगा।
*इस सम्बन्ध में उपयंत्री योगेश आनेराव को कॉल किया गया उन्होंने कॉल नहीं उठाया।*
*इनका कहना*
"उपयंत्री द्वारा जिस टेप से पोल की माप की गई थी, वह टेप गलत था। बाद में दूसरे टेप से माप करने पर पोल की लंबाई निर्धारित मानक के अनुरूप सही पाई गई।"
*नितिन गाडरे, अध्यक्ष, नगर पालिका परिषद आमला*
सरकार और सार्वजनिक नीति
*मानक से कम मिले सेंटर लाइट पोल, तकनीकी रिपोर्ट के बाद भी कार्रवाई नहीं*
*डिवाइडर पहले ही गुणवत्ताहीन मिलने पर तुड़वाया गया, अब पोल की लंबाई पर उठे सवाल; ठेकेदार पर मेहरबानी या जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी?*
July 13, 2026 08:09 PM
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