आमला, 05 जून 2026। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर रचनात्मक एवं सामाजिक संस्था सार्थक सृजन, आमला द्वारा आमला-खानापूर रोड पर कदंब का पौधा रोपित कर उसके संरक्षण एवं निरंतर देखभाल का संकल्प लिया गया। संस्था के सदस्यों ने पर्यावरण संरक्षण को समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताते हुए समाज से प्रकृति के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने का आह्वान किया।

इस अवसर पर संस्था के चंद्रशेखर सोनी, किशोर गुगनानी, यशवंत चढ़ोकार, राजू मदान, लखनलाल सोनी, गुलाबराव खादीपूरे, राजेन्द्र दुबे, राजकुमारी दुबे, देवकी नारे एवं गणपति उबनारे उपस्थित रहे।

संस्था के सदस्यों ने कहा कि “प्रकृति का कल्याण ही मानव जीवन का कल्याण है। प्रकृति को नुकसान पहुंचाकर किया गया विकास वास्तव में विकास नहीं, बल्कि विनाश है।” उन्होंने कहा कि शुद्ध पर्यावरण ही मानव सहित समस्त जीव-जंतुओं के जीवन का आधार है। पृथ्वी पर मौजूद सभी प्राणी किसी न किसी रूप में पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में योगदान देते हैं, लेकिन मनुष्य अपनी असीमित लालसाओं और स्वार्थ के कारण प्रकृति का लगातार दोहन कर रहा है।

वक्ताओं ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज जल, जंगल, जमीन, शुद्ध वायु और प्राकृतिक वातावरण सभी संकट में हैं। प्राकृतिक जीवनशैली पर कृत्रिमता हावी होती जा रही है, जिसके दुष्परिणाम आने वाली पीढ़ियों को भुगतने पड़ सकते हैं। उनका मानना है कि केवल समझाइश और उपदेशों से अपेक्षित बदलाव संभव नहीं दिख रहा है, इसलिए पर्यावरण संरक्षण के लिए कड़े कानूनों और उनके प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता है।

संस्था ने सुझाव दिया कि हरियाली बढ़ाने, जंगलों के संरक्षण एवं विकास, जल स्रोतों के संवर्धन, प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन तथा शहरों की ओर बढ़ते पलायन को रोकने के लिए ठोस प्रयास किए जाने चाहिए। साथ ही सामाजिक आयोजनों में होने वाले अनावश्यक दिखावे, संसाधनों की बर्बादी और जीव-हिंसा पर भी नियंत्रण जरूरी है।

कार्यक्रम में यह भी कहा गया कि नई पीढ़ी को पर्यावरण और प्रदूषण के बीच का अंतर समझाना समय की मांग है। यदि आज प्रकृति संरक्षण के लिए गंभीर और कठोर कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में पृथ्वी पर जीवन के लिए गंभीर चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।

सार्थक सृजन ने विश्व पर्यावरण दिवस पर यह संदेश दिया कि केवल अधिकारों की बात करने के बजाय प्रत्येक व्यक्ति को अपने पर्यावरणीय कर्तव्यों के प्रति सजग और जिम्मेदार बनना होगा, तभी आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और स्वस्थ भविष्य सुनिश्चित किया जा सकेगा।