आमला। सेवाभाव और परोपकार की भावना ही इंसान को आम से खास बनाती है। आमला के युवाओं ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि जरूरत के समय किसी की मदद करना ही सबसे बड़ा मानव धर्म है। सोमवार को ऐसा ही प्रेरणादायक उदाहरण देखने को मिला, जब जनसेवा कल्याण समिति को ग्राम धौसरा निवासी श्रीमती उषा संदीप पटवारी के लिए तत्काल ए पॉजिटिव रक्त की आवश्यकता का संदेश प्राप्त हुआ।
मामले की गंभीरता को देखते हुए समिति के सदस्यों ने महाकाल मोबाइल के संचालक दुर्गेश चौकीकर और कपिल कापसे से संपर्क किया। दोनों युवाओं ने बिना किसी हिचकिचाहट के रक्तदान के लिए सहमति जताई और अपने निजी व व्यावसायिक कार्यों को छोड़कर तत्काल बैतूल जिला चिकित्सालय पहुंच गए। वहां उन्होंने श्रीमती उषा पटवारी के लिए रक्तदान कर मानवता और सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया।
रक्तदान के इस सराहनीय कार्य पर दोनों युवाओं को उनके परिचितों और सामाजिकजनों ने बधाई दी तथा उनके सेवाभाव की प्रशंसा की।
*डेढ़ दशक से चला रही जागरूकता अभियान*
जनसेवा कल्याण समिति विगत लगभग डेढ़ दशक से रक्तदान जागरूकता अभियान चला रही है। संस्था का उद्देश्य जरूरतमंद मरीजों को समय पर रक्त उपलब्ध कराना है। समिति के सदस्य प्रत्येक मरीज को अपने परिवार का सदस्य मानकर उसके लिए रक्तदाताओं की व्यवस्था करने में जुट जाते हैं।
इस दौरान समिति के राहुल धेण्डे, सागर चौहान और राजा राठौर भी पूरी मुस्तैदी के साथ सक्रिय रहे तथा रक्तदान की प्रक्रिया पूरी होने तक अस्पताल में मौजूद रहे।
"जरूरत के समय किसी के काम आना ही सबसे बड़ी सेवा"
रक्तदाता दुर्गेश चौकीकर और कपिल कापसे ने कहा कि बाकी काम बाद में भी किए जा सकते हैं, लेकिन यदि जरूरत पड़ने पर हम किसी के काम नहीं आ सके तो इंसान होने का कोई अर्थ नहीं रह जाता। उन्होंने बताया कि जैसे ही रक्त की आवश्यकता की सूचना मिली, वे बिना देर किए जिला चिकित्सालय पहुंच गए। उनका कहना था कि रक्तदान के बाद मिलने वाला आत्मिक संतोष और सुकून शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता।
*रक्तदान की भावना ही आमला की पहचान*
जनसेवा कल्याण समिति के सागर चौहान ने कहा कि दुर्गेश चौकीकर और कपिल कापसे जैसे जागरूक रक्तदाता ही आमला की परोपकारी संस्कृति और मानवीय संवेदनाओं की पहचान हैं। उन्होंने कहा कि समिति भविष्य में भी अपने सामाजिक दायित्वों का निर्वहन करती रहेगी और रक्तदान की यह जनजागरूकता एवं सेवा की मुहिम लगातार जारी रहेगी।
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