नर्मदापुरम 
राज्यसभा सांसद माया नारोलिया ने सदन में उठाई मध्य प्रदेश के MSME क्षेत्र की आवाज
पंजीकरण में गिरावट पर जताई चिंता, उद्योगों को पुनर्जीवित करने के लिए दिए महत्वपूर्ण सुझाव
नई दिल्ली/भोपाल:
मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद माया नारोलिया ने संसद के बजट सत्र के दौरान प्रदेश के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र के सामने आ रही चुनौतियों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने सदन का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि MSME क्षेत्र राज्य में रोजगार सृजन और स्थानीय आर्थिक विकास की रीढ़ है, लेकिन हाल के समय में इस क्षेत्र में गिरावट चिंता का विषय बनती जा रही है।
माया नारोलिया ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि उद्यम रजिस्ट्रेशन पोर्टल (URP) पर पंजीकृत MSMEs की संख्या में पिछले दो वर्षों में कमी दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि पंजीकरण रद्द होने के बढ़ते मामले यह संकेत देते हैं कि कई व्यवसाय बंद हो रहे हैं। इसका सीधा असर लोगों की आजीविका और औद्योगिक स्थिरता पर पड़ रहा है, खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में।
MSME क्षेत्र को पुनर्जीवित करने के लिए माया नारोलिया ने सरकार के समक्ष पाँच महत्वपूर्ण सुझाव रखे—
जागरूकता अभियान: ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए विशेष अभियान चलाए जाएँ।
वित्तीय व तकनीकी सुगमता: ऋण, सब्सिडी और तकनीकी सहायता प्राप्त करने की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया जाए।
कौशल एवं नवाचार: उत्पादकता बढ़ाने के लिए कौशल विकास और नवाचार आधारित कार्यक्रमों को प्रोत्साहित किया जाए।
सरल अनुपालन: डिजिटल ऑन-बोर्डिंग को बढ़ावा देते हुए नियामक बाधाओं को कम कर ‘व्यापार सुगमता’ (Ease of Doing Business) सुनिश्चित की जाए।
बाजार एवं क्लस्टर विकास: MSMEs को सीधे बाजारों से जोड़ने और क्लस्टर विकास के माध्यम से उन्हें अधिक सशक्त बनाया जाए।
माया नारोलिया ने सरकार से आग्रह किया कि इन उपायों को शीघ्र लागू किया जाए, ताकि मध्य प्रदेश में MSME क्षेत्र के लिए अनुकूल वातावरण तैयार हो सके और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिल सके।