अनाज की कला से शांति का संदेश: छोटे गाँव से उठी बड़ी आवाज़
मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले के छोटे से गाँव सुपरली से एक सकारात्मक और प्रेरणादायक पहल सामने आई है, जहाँ कलाकार योगेंद्रपाल सिंह सोलंकी अपनी अनोखी कला के माध्यम से विश्व को शांति का संदेश दे रहे हैं।
आज जब मिडिल ईस्ट में युद्ध के बीच मिसाइलों और बमों की आवाज़ इंसानियत की पुकार को दबा रही है, वहीं हजारों किलोमीटर दूर बैठे सोलंकी अपनी रचनात्मकता से मानवता को जगाने का प्रयास कर रहे हैं। वे विभिन्न प्रकार के अनाजों—धान, गेहूं, राजगिरा, रागी, अलसी, तिल और खसखस—का उपयोग कर ऐसी कलाकृतियाँ बना रहे हैं, जो गहरे सामाजिक संदेश देती हैं।
इससे पहले उन्होंने डॉलफिन मछली के माध्यम से युद्ध के जलीय जीवन पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव को दर्शाया था। अब उन्होंने शांति के प्रतीक सफेद कबूतर की आकृति बनाकर दुनिया के प्रमुख नेताओं को युद्ध रोकने का संदेश दिया है। उनकी यह कला रूस, चीन, फ्रांस, भारत और इंग्लैंड के राष्ट्राध्यक्षों को संबोधित करते हुए वैश्विक शांति की अपील करती है।
सोलंकी की यह पहल केवल कला तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक गहरी सोच को दर्शाती है—कि युद्ध का असर सिर्फ मानव जीवन पर ही नहीं, बल्कि अन्न और खाद्य सुरक्षा पर भी पड़ता है। अनाज, जो जीवन का आधार है, वही युद्ध के कारण सबसे पहले प्रभावित होता है।
उनकी यह अनूठी कला हमें याद दिलाती है कि शांति ही समृद्धि का मार्ग है। अन्न की रक्षा और मानवता के संरक्षण के लिए युद्ध का रुकना बेहद जरूरी है। छोटे गाँव से उठी यह बड़ी आवाज़ आज पूरे विश्व के लिए एक प्रेरणा बन सकती है।