बल्देवगढ़। बल्देवगढ़ तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत भेलसी में शासकीय भूमि पर कथित अतिक्रमण का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। सबसे गंभीर पहलू यह है कि तहसीलदार न्यायालय द्वारा निर्माण कार्य पर स्थगन आदेश जारी किए जाने के बावजूद मौके पर निर्माण जारी रहने के आरोप लगे हैं। इस घटनाक्रम ने राजस्व एवं प्रशासनिक अमले की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि न्यायालय के आदेश का समय रहते पालन कराया जाता तो सरकारी भूमि पर निर्माण आगे नहीं बढ़ पाता।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, तहसीलदार न्यायालय बल्देवगढ़ ने 5 फरवरी को ग्राम भेलसी स्थित शासकीय भूमि के खसरा नंबर 1184/3, 1152/2 एवं 1267 पर किए जा रहे कथित अवैध निर्माण को लेकर स्थगन आदेश जारी किया था। आदेश में थाना प्रभारी बल्देवगढ़, संबंधित हल्का पटवारी एवं राजस्व निरीक्षक को तत्काल प्रभाव से निर्माण कार्य रुकवाने और आदेश का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए थे। बताया जा रहा है कि उक्त आदेश उसी दिन थाना बल्देवगढ़ में प्राप्त भी हो गया था।
इसके बावजूद आरोप है कि अनावेदक जुगलकिशोर जानकी तनय कुटल्ला कुशवाहा द्वारा शासकीय भूमि पर नए पिलर खड़े कर निर्माण कार्य जारी रखा गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि न्यायालय के आदेश की खुलेआम अवहेलना हुई, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने प्रभावी कार्रवाई नहीं की।
ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत भवन के समीप एवं मुख्य मार्ग से लगी शासकीय भूमि पर लगातार अतिक्रमण की कोशिशें हो रही हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन सख्ती दिखाता तो सरकारी भूमि पर निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ पाता। लोगों का यह भी आरोप है कि प्रशासनिक उदासीनता के कारण अतिक्रमण करने वालों के हौसले बढ़ते जा रहे हैं।
मामले ने उस समय और गंभीर रूप ले लिया जब ग्राम भेलसी के पूर्व सरपंच हरीश सोनी ने आरोप लगाया कि बीती रात ट्रैक्टर एवं जेसीबी मशीन की सहायता से शासकीय भूमि खसरा नंबर 1104 पर बड़े पैमाने पर मिट्टी की भराई कराई गई। उनका दावा है कि यह कार्य रात के अंधेरे में किया गया, जिससे शासन को लाखों रुपये के राजस्व की क्षति पहुंची है। उन्होंने आरोप लगाया कि भूमाफिया बिना किसी भय के सरकारी भूमि पर कब्जे की कोशिश कर रहे हैं और उन्हें प्रशासन का कोई डर नहीं रह गया है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि तहसीलदार न्यायालय के स्थगन आदेश की अवहेलना करने वालों के विरुद्ध राजस्व संहिता एवं अन्य प्रासंगिक कानूनी प्रावधानों के तहत कठोर कार्रवाई की जाए। साथ ही पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर शासकीय भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया जाए, ताकि न्यायालय के आदेशों की गरिमा बनी रहे और भविष्य में ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति न हो।
Continue With Google
Comments (0)