आलोट। रतलाम जिले के आलोट क्षेत्र के ग्राम हरियाखेड़ा में सड़क किनारे लगा विद्युत ट्रांसफॉर्मर ग्रामीणों और मवेशियों के लिए खतरे का कारण बना हुआ है। शुक्रवार को कथित तौर पर करंट की चपेट में आने से एक बछड़े की मौत के कुछ घंटे बाद शाम करीब 6 बजे एक भैंस ने भी दम तोड़ दिया। लगातार मवेशियों की मौत के बाद ग्रामीणों में आक्रोश है।
ग्रामीणों का आरोप है कि ट्रांसफॉर्मर मुख्य सड़क से महज पांच फीट की दूरी पर लगा है और इसके आसपास जमीन पर करंट फैल रहा है। इसी रास्ते से ग्रामीणों के साथ स्कूली बच्चों और मवेशियों की आवाजाही होती है। ग्रामीणों ने विद्युत विभाग से तत्काल सुरक्षा व्यवस्था करने की मांग की है।
15 दिन पहले भी हुई थी भैंस की मौत
ग्रामीणों के मुताबिक करीब 15 दिन पहले भी इसी क्षेत्र में करंट की चपेट में आने से एक भैंस की मौत हुई थी। इसकी कीमत करीब एक लाख रुपये बताई गई है। ग्रामीणों ने विद्युत विभाग के अधिकारियों को घटना की जानकारी देकर मुआवजे की मांग की थी, लेकिन अब तक राहत नहीं मिलने का आरोप लगाया है।
मुआवजे और ट्रांसफॉर्मर को सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करने की मांग को लेकर मदनलाल धनगर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उनका कहना है कि बार-बार हादसे होने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया जा रहा है।
सुपरवाइजर के पहुंचने के बाद सप्लाई चालू करने का आरोप
ग्रामीणों का कहना है कि बछड़े की मौत के करीब एक घंटे बाद विद्युत विभाग के सुपरवाइजर मौके पर पहुंचे थे। ग्रामीणों ने उन्हें ट्रांसफॉर्मर से जमीन पर करंट फैलने की जानकारी दी और विद्युत आपूर्ति बंद करने की मांग की।
ग्रामीणों का आरोप है कि इसके बाद बिजली आपूर्ति दोबारा शुरू कर दी गई। कुछ घंटे बाद शाम करीब 6 बजे एक भैंस करंट की चपेट में आ गई और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। हालांकि, विद्युत विभाग की ओर से इस संबंध में आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
ग्रामीणों का सवाल- मवेशियों के बाद अब किसी बच्चे की जान गई तो जिम्मेदार कौन?
हादसों के बाद ग्रामीणों ने विद्युत विभाग की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि ट्रांसफॉर्मर सड़क और आबादी के बेहद नजदीक है। आसपास बच्चों, ग्रामीणों और मवेशियों की लगातार आवाजाही रहती है।
ग्रामीणों का कहना है कि अभी तक करंट की चपेट में आने से मवेशियों की मौत हुई है। यदि भविष्य में कोई बच्चा या ग्रामीण इसकी चपेट में आ गया तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
पुलिस ने मौके पर पहुंचकर की जांच
घटना की सूचना मिलने के बाद बरखेड़ा कला थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। पुलिस ने मामले में प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की है। ग्रामीणों का कहना है कि केवल प्रकरण दर्ज करने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा।
ग्रामीणों ने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें ट्रांसफॉर्मर को तत्काल सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करना, करंट की चपेट में आकर मृत मवेशियों के पशुपालकों को नियमानुसार मुआवजा देना और लापरवाही के लिए जिम्मेदारी तय करना शामिल है।
डीपी शिफ्ट होने तक जारी रहेगा अनशन
मदनलाल धनगर ने कहा है कि जब तक विद्युत ट्रांसफॉर्मर को सड़क और आबादी के नजदीक से हटाकर सुरक्षित स्थान पर नहीं लगाया जाता, तब तक उनका अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल जारी रहेगा। ग्रामीणों ने भी चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि सड़क से महज पांच फीट दूर लगे इस ट्रांसफॉर्मर की सुरक्षा व्यवस्था कब दुरुस्त होगी और अगला हादसा रोकने के लिए विद्युत विभाग क्या कदम उठाता है।
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