रामनगर मैहर-- रामनगर में खास तौर बारिश का मौसम आते ही जहां आसमान में बादल और धरती पर हरियाली नजर आने लगती है। वहीं बिजली विभाग और आम जनता के बीच आंख-मिचौली’ का खेल भी शुरू हो जाता है। बारिश की एक-दो बूंदें गिरते ही बिजली गुल होना मानो मौसम की पहली आधिकारिक घोषणा बन गई तत्काल साकार रूप ले लेती है।
             आसमान में बिजली चमकती है तो लोग आकाशीय बिजली से बचने की चिंता करते हैं, लेकिन रामनगर में निवासरत घरों में रहने वालों की असली चिंता तब शुरू होती है। जब बिना किसी सूचना के सरकारी बिजली भी गायब हो जाती है।
             *रामनगर की धरती पर बारिश की बूंद और बिजली की टन टन टन छुट्टी*
           बारिश शुरू होते ही बिजली गुल होने पर उपभोक्ताओं का सवाल रहता है कि आखिर हर बार बारिश और बिजली कटौती का रिश्ता इतना गहरा क्यों है? विभाग की ओर से अक्सर सुरक्षा, फॉल्ट, पेड़ की टहनियां या तारों में खराबी जैसे कारण बताए जाते हैं।       जैसे एक शराबी पीने बाद बताया है। कल से मैं शराब नहीं पियूंगा।
           रामनगर उपभोक्ताओं का कहना है कि बारिश के मौसम में बिजली व्यवस्था ऐसी हो जाती है जैसे तारों पर बिजली नहीं बल्कि पूरा सावन झूल रहा हो।
            बारिश के साथ लोग चाय-पकौड़े और सुहाने मौसम का आनंद लेने की तैयारी करते हैं, लेकिन बिजली गुल होते ही रोमांटिक मौसम ‘डार्क मोड’ अंधेरा कायम है में बदल जाता है। घर में मोबाइल की टॉर्च और मोमबत्ती ही रोशनी का सहारा बनती है।
           बिजली का संचित रूप कृत्रिम साधन इन्वर्टर भी लगातार होने वाली कटौती के सामने कुछ समय बाद जवाब दे देता है। पहले उसकी रोशनी टिमटिमाती है और फिर वह भी मानो कह देता है अब मेरी बारी खत्म। जैसे एक रोऊना खिलाड़ी खेल में दाम नहीं देता।
            बिजली विभाग में शिकायत करने पर उपभोक्ताओं को अक्सर एक परिचित जवाब सुनने को मिलता है आगे से फॉल्ट है।’ लेकिन यह ‘आगे’ आखिर कहां है और कब ठीक होगा, इसका जवाब किसी के पास नहीं होता।बिजली आने पर उपभोक्ताओं की खुशी ऐसी होती है, जैसे लंबे इंतजार के बाद भगवान के दर्शन हो गए हों।
           बिजली आपूर्ति को लेकर उपभोक्ताओं में नाराजगी एवं भारी आक्रोश बढ़ रहा है।