डीबी मॉल की आर्ट गैलरी में ग्लोबल स्कूल ऑफ एक्सीलेंस, औबेदुल्लागंज और SENSED संस्था द्वारा आयोजित “द कलर्स ऑफ द कॉन्स्टिट्यूशन” पेंटिंग प्रदर्शनी का आज अत्यंत सफल आयोजन हुआ। संविधान के 76 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम को बड़ी संख्या में आगंतुकों ने देखा और सराहा।
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से कई प्रतिष्ठित सामाजिक एवं सांस्कृतिक हस्तियाँ उपस्थित रहीं, जिनमें शामिल हैं:
| नाम | विवरण / पद |
|---|---|
| श्री राजीव वर्मा | प्रसिद्ध रंगकर्मी |
| सुश्री स्मिता नागदेव | अंतरराष्ट्रीय सितार वादक |
| श्री अन्वेष मंगलम | पूर्व डीजीपी (सेवानिवृत्त) |
| श्री अजातशत्रु श्रीवास्तव | सेवा निवृत आईएएस |
| सुश्री प्रीति पटेल | पटेल ग्रुप की निदेशक |
| श्री मनीष राजोरिया | Career College के निदेशक |
| श्री पी.सी. कोठारी | पूर्व भोपाल बार काउंसिल अध्यक्ष |
औबेदुल्लागंज के बच्चों ने अद्भुत आत्मविश्वास के साथ अपने चित्रों और संविधान के सिद्धांतों को समझाया, जिसे समीक्षकों ने ऐतिहासिक और प्रेरक बताया।
ऐसे कार्यक्रम क्यों ज़रूरी हैं?
आज के बदलते भारत में बच्चों को संविधान समझाना केवल एक शैक्षणिक काम नहीं, बल्कि नागरिक चेतना का विकास है। ऐसे कार्यक्रम बच्चे को यह सिखाते हैं कि:
- अधिकार केवल किताबों तक सीमित नहीं हैं — वे जीवन की वास्तविकता हैं
- कर्तव्य हर नागरिक की ज़िम्मेदारी हैं
- समानता, स्वतंत्रता और न्याय सिर्फ शब्द नहीं बल्कि व्यवहार हैं
- लोकतंत्र तभी मजबूत है जब अगली पीढ़ी उसके मूल्यों को जानकर आगे बढ़े
इन मूल्यों को कला के माध्यम से समझना बच्चों के लिए सबसे प्रभावी तरीका बन जाता है।
संविधान के 76 वर्ष: नई पीढ़ी के लिए क्या संदेश?
भारत का संविधान 76 वर्षों में दुनिया के सबसे सशक्त लोकतंत्रों में से एक की नींव बना। बच्चों को यह समझना जरूरी है कि—
- संविधान सबको बराबरी देता है
- हर आवाज महत्वपूर्ण है
- विविधता हमारी ताकत है
- कानून और व्यवस्था समाज का आधार है
बच्चों की प्रस्तुति ने दर्शकों को क्यों प्रभावित किया?
औबेदुल्लागंज जैसे ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों ने—
- साफ अभिव्यक्ति
- गहरी समझ
- आत्मविश्वास
- और उत्कृष्ट कला कौशल
अतिथियों ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र के इन बच्चों ने अपने गहन ज्ञान, स्पष्ट अभिव्यक्ति और कला कौशल का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है।
दर्शकों ने भी प्रदर्शनी को अत्यंत प्रभावशाली और सीख देने वाला अनुभव बताया।
आयोजन का व्यापक प्रभाव
यह प्रदर्शनी केवल एक आर्ट शो नहीं थी— यह था:
- ग्रामीण बच्चों को बड़ा मंच देने का अवसर
- संविधान से भावनात्मक जुड़ाव
- लोकतंत्र की समझ को मजबूत करने की कोशिश
- और शिक्षा को कला से जोड़ने का अनूठा प्रयास
आयोजकों के अनुसार यह आयोजन ग्रामीण बच्चों की रचनात्मकता को बड़ा मंच देने और उन्हें लोकतांत्रिक मूल्यों से जोड़ने की दिशा में एक सार्थक और सफल प्रयास है।
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