*देवरी विधानसभा में अवैध कॉलोनियों का जाल, कार्रवाई पर उठे सवाल*

*पूर्व मंत्री हर्ष यादव ने प्रशासन से पूछा— आखिर किसके संरक्षण में फल-फूल रहा है अवैध प्लॉटिंग का कारोबार?*

संवाददाता सतीष सेन देवरी सागर 

देवरी, सागर। सागर जिले की देवरी विधानसभा में कथित अवैध कॉलोनियों का मुद्दा लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। बिना आवश्यक स्वीकृतियों और वैधानिक प्रक्रियाओं के प्लॉटिंग एवं जमीनों की खरीद-फरोख्त किए जाने के आरोपों के बीच अब पूर्व मंत्री हर्ष यादव ने भी इस मामले को प्रमुखता से उठाते हुए प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने पूछा है कि आखिर किसके संरक्षण में अवैध कॉलोनियों का कारोबार लगातार फल-फूल रहा है और अब तक प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

पूर्व मंत्री हर्ष यादव का कहना है कि यदि लंबे समय से नियमों को दरकिनार कर कॉलोनियां विकसित की जा रही थीं तो संबंधित विभागों ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की। यदि प्रशासन को इसकी जानकारी थी और फिर भी कार्रवाई नहीं हुई तो यह गंभीर लापरवाही का मामला है, और यदि जानकारी नहीं थी तो यह प्रशासनिक व्यवस्था की विफलता दर्शाता है। दोनों ही परिस्थितियों में जवाबदेही तय होना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में सबसे अधिक नुकसान आम नागरिकों को उठाना पड़ता है। लोग अपनी जीवनभर की कमाई लगाकर प्लॉट खरीदते हैं, लेकिन बाद में सड़क, नाली, पेयजल, बिजली और अन्य मूलभूत सुविधाओं के लिए वर्षों तक परेशान होते हैं। ऐसे में प्रशासन की जिम्मेदारी है कि लोगों के हितों की रक्षा करते हुए नियमों का कड़ाई से पालन कराया जाए।
ग्राम पंचायत के पत्र के बाद भी कार्रवाई नहीं

मामले को और गंभीर बनाते हुए ग्राम पंचायत सिलारी के सरपंच एवं सचिव द्वारा लिखित रूप से कुछ कथित कॉलोनियों के नाम उजागर करते हुए जिला प्रशासन, अनुविभागीय अधिकारी राजस्व एवं संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई के लिए पत्र भेजा गया है। इसके बावजूद अब तक किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई सामने नहीं आने से प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।

*विपक्ष मुखर, सत्ता पक्ष मौन?*

अवैध कॉलोनियों के मुद्दे पर जहां विपक्ष की भूमिका निभा रहे पूर्व मंत्री हर्ष यादव खुलकर सवाल उठा रहे हैं, वहीं सत्ता पक्ष के जनप्रतिनिधियों की चुप्पी भी चर्चा का विषय बनी हुई है। क्षेत्र में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर सत्ता पक्ष के जनप्रतिनिधि इस मुद्दे पर मौन क्यों हैं। क्या राजनीतिक संरक्षण के कारण प्रशासन केवल नोटिस जारी करने तक सीमित है और अवैध कॉलोनाइजरों के विरुद्ध वास्तविक कार्रवाई नहीं हो रही?
एसडीएम का वही जवाब— जानकारी मिलने पर होगी कार्रवाई

इस पूरे मामले में जब भी देवरी के अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) मुनव्वर खान से अवैध कॉलोनियों के संबंध में जानकारी मांगी गई, उन्होंने यही कहा कि संबंधित जानकारी एवं रिकॉर्ड मंगवाए गए हैं। जानकारी उपलब्ध होने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। हालांकि लगातार सामने आ रहे मामलों के बावजूद कार्रवाई में हो रही देरी पर सवाल कायम हैं।

पूर्व मंत्री हर्ष यादव की प्रमुख मांगें
देवरी विधानसभा क्षेत्र की सभी कथित अवैध कॉलोनियों की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।

नियमों का उल्लंघन करने वाले कॉलोनाइजरों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही अथवा मिलीभगत सामने आती है तो उसके विरुद्ध भी कठोर कार्रवाई की जाए।
भविष्य में अवैध कॉलोनियों पर रोक लगाने के लिए पारदर्शी एवं जवाबदेह व्यवस्था लागू की जाए।
देवरी प्रशासन से उठ रहे सवाल
देवरी नगर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार कथित अवैध कॉलोनियों के विकसित होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। ग्राम पंचायतों द्वारा लिखित शिकायतें दिए जाने के बावजूद यदि कार्रवाई नहीं होती है तो स्वाभाविक रूप से प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं। क्षेत्र में यह चर्चा भी है कि क्या प्रशासनिक शिथिलता के साथ-साथ राजनीतिक संरक्षण के कारण अवैध कॉलोनाइजरों पर कार्रवाई नहीं हो पा रही है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कर ठोस कार्रवाई करता है या मामला केवल नोटिसों तक ही सीमित रह जाता है।