*अरबों के बजट वाली धनपुरी नगरपालिका में सहायक ग्रेड-1 को जिम्मेदारी, प्रशासनिक प्रक्रिया और नियमों पर छिड़ी बहस*
*रिपोर्टर :- *जियाउद्दीन अंसारी*
शहडोल । शहडोल संभाग की दो सबसे महत्वपूर्ण नगरपालिकाओं—धनपुरी और बिजुरी—में प्रभारी मुख्य नगरपालिका अधिकारी (सीएमओ) की नियुक्ति को लेकर जारी आदेश ने प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। संयुक्त संचालक, नगरीय प्रशासन एवं विकास के आदेश में जहां बिजुरी नगरपालिका का अतिरिक्त प्रभार एक नियमित सीएमओ को सौंपा गया है, वहीं करोड़ों-अरबों रुपये के बजट वाली धनपुरी नगरपालिका का प्रभार सहायक ग्रेड-1 कर्मचारी को दिए जाने पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
जानकारों का कहना है कि इतने बड़े वित्तीय और प्रशासनिक दायित्व वाले निकाय में अनुभवी अधिकारी के बजाय कनिष्ठ कर्मचारी को जिम्मेदारी सौंपना सामान्य प्रशासनिक परंपराओं से अलग निर्णय माना जा रहा है। इस फैसले के बाद आदेश की प्रक्रिया, औचित्य और नियमों के पालन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
दो नगरपालिकाएं, दो अलग मापदंड?
आदेश के अनुसार अनूपपुर जिले की बिजुरी नगरपालिका का अतिरिक्त प्रभार जैतहरी के मुख्य नगरपालिका अधिकारी भूपेन्द्र सिंह को दिया गया है। वहीं शहडोल जिले की धनपुरी नगरपालिका का प्रभार सहायक ग्रेड-1 सचिन कचेर को सौंपा गया है। दोनों नगरपालिकाएं कोयला क्षेत्र की समृद्ध नगरीय निकाय हैं, जहां बड़े पैमाने पर विकास कार्य और सरकारी योजनाओं का संचालन होता है। ऐसे में अलग-अलग स्तर के अधिकारियों को प्रभार देने के निर्णय पर सवाल उठ रहे हैं।
वाटर पार्क मुआवजा प्रकरण से भी जोड़े जा रहे सवाल
धनपुरी नगरपालिका क्षेत्र में बहुचर्चित वाटर पार्क भूमि मुआवजा प्रकरण पहले से चर्चा में रहा है। इस मामले में शिकायतें और जांच की मांग समय-समय पर उठती रही है। ऐसे में प्रभारी सीएमओ की नियुक्ति को लेकर स्थानीय स्तर पर विभिन्न तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हालांकि इन चर्चाओं की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और न ही इस संबंध में विभाग की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आया है।
करोड़ों के फैसले, जिम्मेदारी किसके हाथ?
धनपुरी नगरपालिका में हर वर्ष करोड़ों रुपये के विकास कार्य, निर्माण, भुगतान और विभिन्न योजनाओं का संचालन होता है। प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे निकायों में निर्णय लेने और वित्तीय जवाबदेही के लिए अनुभवी अधिकारी की नियुक्ति अधिक उपयुक्त मानी जाती है। इसी कारण सहायक ग्रेड-1 कर्मचारी को प्रभारी सीएमओ बनाए जाने के निर्णय पर विभाग के भीतर भी चर्चा हो रही है।
नियमों पर उठे सवाल
पूर्व प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि प्रभारी व्यवस्था बनाते समय सामान्यतः समकक्ष या पात्र अधिकारी को प्राथमिकता दी जाती है। ऐसे में इस आदेश की वैधानिक प्रक्रिया और विभागीय नियमों के अनुरूपता को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। यदि विभाग के पास इस निर्णय के पीछे कोई विशेष प्रशासनिक कारण है, तो उसे सार्वजनिक किए जाने की मांग भी सामने आ रही है।
जेडी से संपर्क नहीं हो सका
इस संबंध में संयुक्त संचालक अक्षय भट्ट का पक्ष जानने के लिए दूरभाष पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
Continue With Google
Comments (0)