गेहूं खरीदी में देरी के विरोध में किसान संघ का धरना आज
10 अप्रैल से शुरु होना हैं गेहूं खरीदी, तीन वर्ष बाद किसानों का पंजीयन 4 हजार पार

बड़वानी :-रबी सीजन की प्रमुख गेहूं फसल खेतों से निकलकर किसानों के खलिहानों में विक्रय का इंतजार कर रही हैं। वहीं प्रति वर्ष अनुसार इस वर्ष शासन के निर्देश पर प्रशासन ने समर्थन मूल्य खरीदी की तिथि बढ़ाई जा रही हैं। खरीदी में देरी के चलते मार्च अंत तक किसान समय पर सोसायटी में अपना बकाया जमा नहीं कर पाए। ऐसे में अधिकांश किसान डिफाल्टर हो गए। समय पर गेहूं खरीदी शुरु नहीं करने के विरोध में भारतीय किसान संघ द्वारा 6 अप्रैल को जिलेभर में तहसील स्तरों पर सांकेतिक धरना प्रदर्शन किया जाएगा।
बता दें कि इस वर्ष गेहूं फसल का उत्पादन जिले में बेहतर नजर आ रहा हैं। गत माह से ही किसान खेतों से गेहूं निकालकर सुरक्षित रखने लगे हैं। वहीं प्रति वर्ष 25 मार्च से गेहूं की समर्थन मूल्य पर खरीदी शुरु होती हैं। इस बार बाजार में अचानक गेहूं के दाम कम होकर समर्थन मूल्य से नीचे पहुंच गए हैं। ऐसे में किसानों ने बाजार के मुकाबले समर्थन मूल्य पर गेहूं विक्रय के लिए पंजीयन में रुचि दिखाई, लेकिन शासन समय पर गेहूं खरीदी शुरु नहीं कर पाया। दरअसल पूर्व में गेहूं खरीदी 30 मार्च से होना था, लेकिन राज्य शासन के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने इसमें संसोधन कर 10 अप्रैल तक बढ़ा दी। जिससे किसानों में रोष है। भारतीय किसान संघ के जिला मंत्री कमलसिंह तोमर ने कहा कि सहकारी बैंकों ने ० प्रतिशत ब्याज पर सेवा सहकारी की ड्यू रेट 28 मार्च से आगे नहीं बढ़ाई। ऐसे किसानों को साल भर का 7 प्रतिशत ब्याज और 14 प्रतिशत दंड लग गया इससे किसानों पर आर्थिक बोझ आ गया। तोमर ने कहा कि सरकार ने गेहूं खरीदी की तारीख 10 अप्रैल कर दी और सोसायटी के पेसे जमा करने की तिथि 28 मार्च थी। ऐसे में समय पर पैसे जमा नहीं करने पर 60 प्रतिशत किसान डिफॉल्टर हो गए हैं। जबकि पिछले वर्ष के डिफाल्टर किसानों को सरकार द्वारा ब्याज की राशि वापिस करने का वादा किया था, जो आज तक पूरा नहीं हुआ है। इसके विरोध में 6 अप्रैल को प्रदेश स्तरीय आह्वान पर जिलेभर में तहसील स्तरों पर सांकेतिक धरना प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपा जाएगा।

*पराली के नाम पर एफआइआर मंजूर नहीं*

जिला मंत्री तोमर ने कहा कि खेत की सफाई के दौरान गेहूं के खापे यानी पराली जलाने पर किसानों पर एफआईआर कार्रवाई मंजूर नहीं है। अन्न दाता को जेल भेजना और अर्थदंड लगना ठीक नहीं है। इससे तो यह प्रतीत होता है कि सरकार किसानों के प्रति कितनी गंभीर है। अन्नदाता के प्रति देशद्रोही जैसा व्यवहार उचित नहीं हैं। उन्होंने कहा कि सरकार जब पराली के निष्पादन के लिए कोई स्थाई हल नहीं निकाले, जब तक किसानों पर कोई कार्रवाई नहीं की जाए।

*11 क्विंटल प्रति बिगा के हिसाब से होग खरीदी*

भारतीय किसान संघ मंत्री ने कहा कि इस बार किसानों की दिन, रात कड़ाके की ठंड में मेहनत और सरकार द्वारा उपलब्ध संसाधन से मध्य प्रदेश में गेहूं का बंपर उत्पादन हुआ है। सरकार को 11 क्विंटल प्रति बिगा के हिसाब से गेहूं की खरीदी समर्थन मूल्य पर करना चाहिए। सरकार बारदान की कमी बता कर खरीदी प्रति बिगा कम करने का षडयंत्र कर रही ये करना सरकार की किसान विरोधी मानसिकता को दिखा रहा है। किसानों की राष्ट्रवादी सोच को सरकार उनकी कमजोरी ना समझे।

*तीन वर्ष बाद खरीदी की उम्मीद, 4738 हुआ पंजीयन*

बता दें कि जिले में इस वर्ष अब तक समर्थन मूल्य पर गेहूं विक्रय के लिए 4738 किसानों ने पंजीयन कराया हैं। गत वर्ष यह आंकड़ा 1159 ही रहा था। बीते तीन वर्ष से जिले में समर्थन मूल्य पर खरीदी का आंकड़ा शून्य पर दर्ज हो रहा हैं। इस वर्ष शासन ने गेहूं का दाम 2625 रुपए प्रति क्विंटल तय किया हैं। जिसमें 2585 रुपए समर्थन मूल्य और 40 बोनस शामिल है। वहीं जिले में इस वर्ष खरीदी के लिए बड़वानी के तलून सहित सेंधवा, अंजड़, पानसेमल खेतिया में कुल चार केंद्र स्थापित किए हैं। हाट बाजार में बिकने आया गेहूं
समर्थन मूल्य पर खरीदी में देरी के चलते शहर में रविवार को लगे हाट बाजार में बड़ी संख्या में किसान ट्रैक्टर ट्रॉलियों में गेहूं बोरियां भरकर बेचने पहुंचे थे हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी मुख्य मार्ग पर सड़क के दोनों ओर बड़ी संख्या में शहरवासयों ने जरुरत व क्वालिटी अनुसार गेहूं की खरीदी की। इस दौरान गेहूं का भाव 2200 से 2300 रुपए प्रति क्विं. के बीच रहा। वहीं उच्च क्वालिटी का गेहूं 2500 से 2600 रुपए तक भी बिका। किसानों के अनुसार खेत साफ होकर अब नई फसल की तैयारी और घरेलू कामकाज के लिए भी रुपए की आवश्यकता होती हैं। ऐसे में बाजार में नकदी में भी उपज बेचना पड़ रही है।

*किसान-मजदूर महासंघ का धरना 9 अप्रैल को*

वहीं खेती-किसानी की विभिन्न समस्या व मांगों को लेकर राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ भी 9 अप्रैल को जिला मुख्यालय पर कलेक्टर कार्यालय द्वार पर धरना प्रदर्शन करेगा। जिलाध्यक्ष मदन मुलेवा ने बताया कि मुख्य मांगों में किसानों की ऋण वसूली पर रोक लगाई जाए। डिफॉल्टर किसानों को रेगुलर किया जाए। किसानों को ऋण मुक्त किया जाए। वर्षा से हुए नुकसान का तुरंत मुआवजा दिया जाए। मक्का की फसल के साथ गेहूं को भी खुले में एमएसपी पर खरीदा जाए। पंजीयन में समिति में गेहूं डालने पर किसानों के पैसे काटने की व्यवस्था बंद की जाए।