आरटीआई में नहीं दी व्यवस्था व खर्च की जानकारी, बड़वानी-इंदौर के सहकारिता आयुक्त के विरुद्ध लेना पड़ी उच्चा न्यायालय की शरण
उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने 60 दिन में राहत प्रदान करने का दिया आदेश

बड़वानी -किसी भी सरकारी विभाग या सरकारी सहायता प्राप्त संस्था से जानकारी प्राप्त करने, पारदर्शिता बढ़ाने, जवाबदेही तय करने और भ्रष्टाचार को कम करने के लिए किया जाता है। यह नागरिकों को सरकारी फाइलों, दस्तावेजों, कार्यों की जांच और रिपोर्ट की प्रतियां मांगने का कानूनी अधिकार देता है, लेकिन ऐसे मामलों में संबंधित विभाग व अधिकारी आरटीआई एक्ट का माखौल उड़ाते हुए जानकारी देने से बचते नजर आते हैं। ऐसा ही मामले में क्षेत्र के युवक ने बड़वानी और इंदौर के सहकारिता आयुक्त से बीज गोदाम, गेहूं उपार्जन और अन्य व्यवस्था तथा खर्चों की जानकारी सूचना का अधिकार यानी आरटीआई से मांगी थी, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी जानकारी नहीं दे पाए। इसके बाद युवक को न उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया और याचिका दायर की। इस संबंध में मप्र उच्च न्यायालय ने जिले की सहकारी संस्था से संबंधित सूचनाएं उपलब्ध करवाने का आदेश जारी किया है। बता दें कि सहकारी समितियों में लंबे समय से प्रतिनिधियों के निर्वाचन नहीं हो रहे हैं। ऐसे में अधिकारियों पर याचिकाकर्ता ने बताया कि सहकारी समिति में बड़े पैमाने पर किए गए
भ्रष्टाचार के पर्दाफाश के डर से उन्हें जानकारी उपलब्ध नहीं करवाई गई और उन्हें मजबूर होकर उच्च न्यायालय तक गुहार लगानी पड़ी। यह है पूरा मामला याचिकाकर्ता राहुल यादव की याचिका की न्यायालय द्वारा 18 मार्च को यह आदेश जारी किया है। याचिकाकर्ता द्वारा आदिम जाति सहकारी समिति से समिति के बीज गोदाम और मांगलिक भवन के निर्माण और संचालन, राशन दुकानों के संचालन, किसानों की कर्जमाफी, रासायनिक खाद वितरण, गेहूं उपार्जन, बारदानों की खरीदी बिक्री, समिति का आम सभाओं की कार्रवाईयों आदि पर किए गए खर्चों से संबंधित जानकारियां चाही गई थी, लेकिन निर्धारित समयसीमा में सहकारिता विभाग के सहायक आयुक्त बड़वानी और संयुक्त आयुक्त इंदौर ने उक्त जानकारी उपलब्ध नहीं करवाई।
याचिकाकर्ता ने कहा कि राज्य सूचना आयोग में भी जब समय सीमा में सुनवाई नहीं हुई तो उन्हें उच्च न्यायालय की शरण लेनी पड़ी। न्यायाधीश प्रणय वर्मा की एकल पीठ ने राज्य सूचना आयोग को 60 दिनों में राहत प्रदान करने का आदेश दिया।