अनूपपुर। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले के ग्राम केल्हौरी में शासकीय भूमि पर अतिक्रमण का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने समूचे राजस्व विभाग और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहाँ करोड़ों रुपये की बेशकीमती सरकारी जमीन, जो आदिवासियों और प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए आरक्षित थी, उस पर रसूखदारों और भू-माफियाओं ने अवैध कब्जा कर निर्माण कार्य शुरू कर दिया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस मामले में माननीय उच्च न्यायालय (जबलपुर) में याचिका लंबित है और तहसीलदार न्यायालय का 'स्टे ऑर्डर' भी प्रभावी है, फिर भी मौके पर निर्माण कार्य रुकने का नाम नहीं ले रहा है।

शासकीय भूमि खसरा नं. 1595/1 और 1667 पर अवैध कब्जा
शिकायती दस्तावेजों के अनुसार, ग्राम केल्हौरी (प.ह. नं. 09) के खसरा नंबर 1595/1 (रकबा 4.268 हेक्टेयर) और 1667 पर अवैध अतिक्रमण का खेल लंबे समय से चल रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि यह भूमि 'प्रधानमंत्री जनमन योजना' के तहत आवास निर्माण हेतु सुरक्षित की गई थी। लेकिन वर्तमान में यहाँ गुल मोहम्मद, लल्ला सरंगिया, रज्जन गुप्ता,  और गाजी खान जैसे दर्जनों लोग अवैध रूप से मकान और बाउंड्रीवाल का निर्माण कर रहे हैं।

हाईकोर्ट की दहलीज पर पहुँचा मामला (W.P. No. 19612/2025)
मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय निवासी चेतन नाहर ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर की शरण ली है। न्यायालय में दायर याचिका में राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव, शहडोल कमिश्नर, अनूपपुर कलेक्टर और तहसीलदार को प्रतिवादी बनाया गया है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि सरकारी जमीन पर हो रहा यह अतिक्रमण न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि उन गरीब आदिवासियों के हक पर भी डाका है जिनके लिए यह जमीन आरक्षित थी।

तहसीलदार का 'स्टे' कागजों तक सीमित!
दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि तहसीलदार न्यायालय अनूपपुर ने 04 दिसंबर 2025 को एक सख्त स्थगन आदेश  जारी किया था। आदेश में स्पष्ट उल्लेख था कि:अनावेदक गुल मोहम्मद तत्काल निर्माण कार्य बंद करे।
आगामी आदेश तक मौके पर यथास्थिति बनाए रखी जाए। वही आदेश का उल्लंघन करने पर भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा-248 के तहत दंडात्मक कार्यवाही की जाएगी।
विडंबना देखिए कि इस आदेश की प्रति थाना प्रभारी चचाई और राजस्व निरीक्षक मंडल को भी भेजी गई थी, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि मौके पर पुलिस और राजस्व अमले की मौजूदगी के अभाव में अतिक्रमणकारी बेखौफ होकर निर्माण कार्य को अंजाम दे रहे हैं।

पटवारियों की भूमिका संदिग्ध, पुराने रिकॉर्ड की जांच की मांग
कमिश्नर शहडोल को सौंपे गए एक अन्य शिकायत पत्र में ग्रामीणों ने राजस्व अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का दावा है कि पूर्व में 8 जनवरी 2010 को तत्कालीन राजस्व अधिकारियों ने अतिक्रमणकारियों पर जुर्माना लगाकर जमीन रिक्त करा ली थी। लेकिन बाद में कुछ पटवारियों ने मिलीभगत कर बिना किसी वैध सरकारी आदेश के फर्जी तरीके से पट्टे और कब्जे की जमीन का आवंटन दिखा दिया। वर्तमान में पदस्थ पटवारी पर भी अतिक्रमणकारियों को संरक्षण देने के आरोप लग रहे हैं।

ग्रामीणों का आक्रोश: "हमारी जमीन, हमारा हक"
13 फरवरी 2026 को कलेक्टर कार्यालय में पत्र देते  हुए राजु बैगा, दशरथ बैगा, संतोष पनिका और अन्य ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने तुरंत हस्तक्षेप कर खसरा नंबर 1595/1 से अवैध निर्माण नहीं हटवाया, तो वे सामूहिक रूप से उग्र आंदोलन करेंगे। ग्रामीणों की मांग है कि:एक विशेष जांच टीम गठित कर पुराने खसरों और पट्टों की निष्पक्ष जांच हो।
 कोर्ट के स्टे ऑर्डर का उल्लंघन करने वालों पर तुरंत एफआईआर दर्ज की जाए।
 आदिवासियों के लिए आरक्षित भूमि को भू-माफियाओं के चंगुल से मुक्त कराया जाए।
अब देखना यह है कि क्या जिला प्रशासन माननीय उच्च न्यायालय के निर्देशों और अपने ही मातहतों द्वारा जारी स्टे ऑर्डर का सम्मान कराते हुए आदिवासियों के हक की रक्षा कर पाता है या नहीं।