खकनार
मांदल–बांसुरी की धुन पर झूमा भगोरिया, रंग-गुलाल से सजा बाजार
खकनार। सदियों से चली आ रही आदिवासी परंपरा के तहत होली के पावन अवसर पर आदिवासी समाज का प्रमुख त्योहार भगोरिया पर्व तहसील मुख्यालय खकनार में हर्षोल्लास और उत्साह के साथ मनाया गया। सोमवार को आयोजित भगोरिया हाट में हजारों की संख्या में आदिवासी समाजजन बाजार में पहुंचे और पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला।
परंपरा के अनुसार सुबह से ही स्थानीय पुलिस थाने के सामने पारंपरिक वेशभूषा में युवक-युवतियां मांदल और बांसुरी की मधुर धुन पर थिरकते नजर आए। रंग-गुलाल उड़ाते हुए युवा, महिलाएं और बच्चे पारंपरिक नृत्य में शामिल हुए। पुलिस थाने से बाजार क्षेत्र तक भव्य चल समारोह निकाला गया, जिसमें समाज के हजारों लोग शामिल हुए और मांदल की थाप पर जमकर नाचे।
भगोरिया हाट में खरीदारी का विशेष आकर्षण रहा। बाजार में पिचकारी, रंग-गुलाल, नए कपड़े, चांदी के आभूषण, शक्कर के हार, कंगन, चने और फूटाने की जमकर बिक्री हुई। बाजार की स्थिति यह रही कि पांव रखने तक की जगह नहीं थी। युवाओं ने एक-दूसरे को कुल्फी, पान और भजिए खिलाकर पर्व की खुशियां साझा कीं, वहीं युवतियों और युवकों ने झूलों का आनंद भी लिया।
आदिवासी समाज के लोगों ने बताया कि वे वर्ष भर होली और भगोरिया पर्व का इंतजार करते हैं। इस अवसर पर नए वस्त्र और आभूषण खरीदना शुभ माना जाता है। साथ ही समाज की पंचायत में ग्राम विकास और समाज कल्याण के विषयों पर चर्चा की जाती है। यदि वर्ष भर में किसी प्रकार का मनमुटाव हो जाता है, तो इस पर्व पर लोग एक-दूसरे से गले मिलकर उसे समाप्त कर देते हैं और प्रेम व भाईचारे के साथ त्योहार मनाते हैं।
भगोरिया पर्व ने एक बार फिर सामाजिक एकता, परंपरा और संस्कृति की जीवंत मिसाल प्रस्तुत की।

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