खंडवा
मध्य प्रदेश के खंडवा सहित पूरे निमाड़ अंचल में मां गणगौर का पर्व तीन दिनों तक हर्ष, उल्लास और गहरी आस्था के साथ मनाया गया। इस दौरान शहर का हर गली-मोहल्ला भक्ति और उत्सव के रंग में रंगा नजर आया।
खंडवा शहर में लगभग 300 रथों सुसज्जित कर माता गणगौर (जवारे रूपी मां) को श्रद्धालु अपने घर लाए, जहां विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि, वैवाहिक जीवन की मंगलकामना और खुशहाली की प्रार्थना की गई।
गणगौर पर्व का विशेष महत्व महिलाओं के लिए माना जाता है। सुहागिन महिलाएं अपने पति एवं परिवार की सुख समृद्धि मंगलकामनाओं के लिए माता गणगौर की पूजा करते हैं।
पूरे तीन दिनों तक घर-घर में माता का श्रृंगार, पूजन, भजन-कीर्तन और पारंपरिक रीति-रिवाजों का आयोजन हुआ। महिलाओं और युवतियों ने पारंपरिक वेशभूषा धारण कर सिर पर माता गणगौर एवं धनियर राजा के सुसज्जित रथों के साथ भक्ति गीत गाते हुए वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
यह पर्व केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि भावनात्मक जुड़ाव का भी अद्भुत उदाहरण है। जिस प्रकार एक मां अपनी पुत्री को विवाह के बाद नम आंखों से विदा करती है, उसी तरह श्रद्धालु माता गणगौर को अपने घर लाकर पूरे प्रेम और समर्पण के साथ सेवा करते हैं और अंत में भावुक मन से विदाई देते हैं।
यह परंपरा समाज में पारिवारिक मूल्यों और सांस्कृतिक एकता को भी मजबूत करती है।
ऐसे सांस्कृतिक कार्यक्रम में परिवार, रिश्तेदारों सहित पड़ोसियों एवं हर कोई एकता के सूत्र में बंध जाता है हर कोई सच्ची श्रद्धा के साथ एकजुट होकर मां की भक्ति करता है
पर्व के अंतिम दिन गणगौर घाट आबना नदी तट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। ढोल-नगाड़ों, भक्ति गीतों और जयकारों के बीच माता की शोभायात्राएं निकाली गईं। पूरे शहर में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला, जहां हर कोई माता की भक्ति में लीन नजर आया।
विदाई के इस भावुक क्षण में हर आंख नम हो उठी। माता गणगौर को नदी में विसर्जित करते समय श्रद्धालुओं ने अगले वर्ष पुनः आगमन की कामना की। इस दौरान वातावरण में आस्था, प्रेम और विरह का अद्भुत संगम देखने को मिला।
इस प्रकार परंपरा, संस्कृति और गहरी भावनाओं से ओत-प्रोत गणगौर पर्व खंडवा में भव्य और यादगार रूप से संपन्न हुआ, जिसने निमाड़ अंचल की सांस्कृतिक समृद्धि और आस्था को एक बार फिर जीवंत कर दिया।

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