युद्ध का कारण बताकर बाजार में महंगी कर रहे सामग्री, लेकिन किसान की उपज के दाम हो गए कम
बड़वानी :-ईरान-इजरायल युद्ध के बीच अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों बयां कर अधिकांश व्यापारियों द्वारा बाजार में विभिन्न वस्तुओं के दाम बढ़ाकर बेचे जा रहे हैं। जबकि कृषि उपज मंडियों में किसानों की उपज के दाम लगातार कम हो रहे हैं। यह शिकायत राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ ने की। कलेक्टर कार्यालय में बुधवार दोपहर पदाधिकारी-किसानों ने नायब तहसीलदार सोनू गोयल को राष्ट्रपति, मुख्यमंत्री व कलेक्टर के नाम के तीन ज्ञापन सौंपे। इसके पूर्व कृषि उपज मंडी में किसानों की बैठक हुई। जिसमें विभिन्न मांग समस्या पर चर्चा की गई। किसानों ने ज्ञापन के माध्यम से बताया कि जिले में केला फसल, जिसका भारत से निर्यात मात्र 1 प्रतिशत होता हैं, उसके भाव आधे कर दिए गए हैं। व्यापारियों द्वारा युद्ध का बहाना बनाकर किसानों की उपज सस्ते में खरीदी जा रही हैं। जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान हो रहा है। किसान महासंघ ने कलेक्टर से मांग की हैं कि उक्त मामले में जांच की जा और बाजार में अनावश्यक मूल्य वृद्धि पर नियंत्रण किया जाए। साथ ही किसानों की उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित किया जाए। वहीं राज्यपाल व मुख्यमंत्री के नाम सौंपे एक अन्य आवेदन में मांग की गई कि किसानों के गेहूं की फसल का औसत मूल्य कम से कम 2700 रुपए प्रति क्विंटल दिया जाए। गत रबी सत्र में गेहूं का समर्थन मूल्य 2475 रुपए व 175 रुपए बोनस मिलाकर 2600 रुपए मूल्य दिया है। केंद्र सरकार ने वर्तमान सत्र में समर्थन मूल्य में 110 रुपए वृद्धि की हैं, लेकिन राज्य सरकार ने बोनस घटाकर किसानों से यह वृद्धि छीन ली। जबकि अन्य प्रदेशों में समर्थन मूल्य सहित बोनस मिलाकर 2735 रुपए क्विं. औसत मूल्य उपलब्ध करा रही है। वहीं मांग की गई कि समर्थन मूल्य केंद्र पर गेहूं की फ्लेट कांटे पर तुलाई की जाए। एफएक्यू चार्ट चस्पा किया जाए। दूध के भाव 10 प्रतिशत प्रति फेट के हिसाब से और राज्य शासन द्वारा घोषित 5 रुपए लीटर की बोनस की राशि दी जाए। विद्युत कंपनी द्वारा किसानों पर मनमाने पंचनामे बनाकर अवैध वसूली बंद की जाए।

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