सीहोर विजय मालवीय
ब्रिटिश हुकूमत पर 'सेठ' का उधार: 109 साल बाद पोता वसूलेगा सूद समेत कर्ज!"
साहब! कर्ज चुकाओ... 109 साल पुराने उधार का हिसाब मांगने निकला है ये पोता।"
आपने कभी सुना है कि किसी भारतीय परिवार ने ब्रिटिश हुकूमत को ही कर्ज दे दिया हो?
जी हां, चौंकिए मत! मध्य प्रदेश के सीहोर से एक ऐसा ही मामला सामने आया है
109 साल पहले दिया गया 35 हजार का कर्ज... और अब उसका हिसाब होगा सूद समेत!
यह कहानी शुरू होती है प्रथम विश्व युद्ध के दौर में, जब भोपाल रियासत की नवाब सुल्तान जहां बेगम के बाद प्रदेश के दूसरे सबसे अमीर शख्स, सेठ जुम्मा लाल रूठिया ने ब्रिटिश हुकूमत को उनके मैनेजमेंट के लिए 35 हजार रुपए का कर्ज दिया था।
आज के दौर में 35 हजार मामूली लग सकते हैं, लेकिन 1917 में यह रकम करोड़ों के बराबर थी।
अंग्रेज देश छोड़कर चले गए, हुकूमतें बदल गईं, लेकिन सीहोर के इस रईस परिवार के पास आज भी वो 'दस्तावेज' मौजूद हैं, जो गवाही देते हैं उस ऐतिहासिक लेनदेन की।"
वही विवेक रठिया का कहना है कि"मेरे दादाजी ने यह राशि ब्रिटिश सरकार को दी थी। अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक, एक संप्रभु राष्ट्र अपने पुराने कर्जों को चुकाने के लिए बाध्य है। हम अब ब्रिटिश क्राउन को लीगल नोटिस भेज रहे हैं।"
"आपको जानकर हैरानी होगी कि जिस रूठिया परिवार की हम बात कर रहे हैं, कहा जाता है कि सीहोर शहर की 40 से 45 फीसदी जमीन आज भी उन्हीं के नाम पर है। इंदौर से लेकर भोपाल तक इस परिवार की संपत्तियां फैली हुई हैं।
1917 की वो रसीद और लिखा-पढ़ी आज भी सुरक्षित है।
दादा जुम्मा लाल के पोते विवेक रूठिया इस हक की लड़ाई लड़ रहे हैं।
करोड़ों की इस देनदारी पर अब सब की नजरें टिकी हैं। क्या ब्रिटेन का शाही परिवार सीहोर के इस परिवार का कर्ज लौटाएगा?
"यह सिर्फ पैसों की बात नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक दावे की बात है। अगर यह दावा कानूनी रूप से सफल होता है, तो यह भारत के इतिहास के सबसे बड़े वित्तीय मामलों में से एक होगा।

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