बड़वानी:-मध्यप्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र इन तीन प्रमुख राज्यों की सीमा पर स्थित तोरणमाल पर लिखी पहली पुस्तक का विमोचन गोरखनाथ मठ मंदिर के मठाधीश महंत संजुनाथ महाराज ने मंगलवार को प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस शहीद भीमा नायक शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में किया। इस मौके पर महाराज ने कहा कि तीन राज्य सरकारों को उक्त जगह कारिडोर बनाना चाहिए। क्योंकि यहां धार्मिक, आध्यात्मिक, ऐतिहासिक और रोमांचक पर्यटन के विकास की हैं अभूतपूर्व संभावनाएं है। यह पुस्तक प्रसिद्ध इतिहासकार, लेखक, शिक्षाविद और अवधेश प्रतापसिंह विश्वविद्यालय रीवा के पूर्व कुलपति डॉ. शिवनारायाण यादव ने लिखी है। पुस्तक विमोचन कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य डॉ. वीणा सत्य ने की। विशेष अतिथि के रूप पूर्व सिविल सर्जन डॉ. रमेशचंद्र चोयल मौजूद रहे। वहीं इतिहास विभाग के डॉ. बलराम बघेल, डॉ. महेशलाल गर्ग और ग्रंथालय से डॉ. विनय गोरे विशेष रूप से उपस्थित थे। महंत संजूनाथ ने युवाओं को अपनी संस्कृति और धर्म से जुड़ने तथा
रोजगार के नए अवसर तलाशने का संदेश दिया। उनकी दिव्य उपस्थिति युवाओं के लिए प्रेरक रही। कार्यक्रम में प्राचार्य डॉ. सत्य ने कहा कि लेखक डॉ. शिवनारायाण यादव को कुली से कुलपति सहित अनेक पुस्तकों के लेखन का व्यापक अनुभव है। उनकी नवीन कृति गुरु गोरखनाथ की तपस्या स्थली, चमत्कारों की भूमि अंग्रेजों का हिल स्टेशन तोरणमाल रोचकता और तथ्यों से इस तरह से संजोई गई है कि वह पर्यटकों और आम पाठकों के साथ ही रिसर्चर्स के लिए भी अत्यधिक उपयोगी है। तोरणमाल क्षेत्र चिकित्सकीय वनस्पतियों से भी युक्त है। यहां स्टार्टअप और उद्यमिता
युवा संसाधन केंद्र
के लिए अत्यधिक संभावनाएं हैं। डॉ. सत्य ने कहा कि युवाओं की पहली मित्र पुस्तकें होती हैं। प्रत्येक विद्यार्थी को तोरणमाल पुस्तक का अध्ययन करना चाहिए। यह पुस्तक करियर सेल, भारतीय ज्ञान प्रकोष्ठ और महाविद्यालय के ग्रंथालय में भी उपलब्ध रहेगी। अतिथि स्वागत गीत हंसा धनगर, आरती धनगर, दिव्या जमरे ने प्रस्तुत किया। संचालन भोलू बामनिया ने किया। ग्रंथ की समीक्षा डॉ. मधुसूदन चौबे ने प्रस्तुत की। आभार डॉ. विनय गोरे ने व्यक्त किया। कार्यक्रम में संजु डूडवे, कन्हैयालाल फूलमाली, नागर डावर, अनुष्का शर्मा, देवप्रिया चौहान, रीना चौहान, श्रुति सेन का सहयोग रहा।
तीन खंडों में विभक्त है ग्रंथ -
लेखक डॉ. शिवनारायण यादव ने कहा कि इस ग्रंथ में तीन खंड हैं। प्रथम खंड में भारत में नाथ संप्रदाय की उत्पत्ति तथा उसके विस्तार का प्रामाणिक विवरण दिया गया है। द्वितीय खंड में तोरणमाल में नाथ संप्रदाय के संतों का आगमन, गुरु गाड़ी की स्थापना और उस संस्थान की ऐतिहासिकता से संबंधित दस्तावेजों का विवरण दिया है। तीसरे खंड में तोरणमाल के दर्शनीय स्थलों और यहां के नैसर्गिक सौंदर्य का विवरण दिया है। डॉ. यादव ने पुस्तक की रचना प्रक्रिया के बारे में नई पीढ़ी को विस्तार से जानकारी दी और मोबाइल के स्थान पर किताबों से जुडने का आह्वान किया।

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