उमरिया: नकली बीज का खेल शुरू, लगभग 250 में से दर्जन भर दुकानें अवैध हैं जो किसानों को नकली वा बिना वैद्य लायसेंस के बीज उपलब्ध करा रही है। वहीं अब तो वर्षो से जमें कृषि विभाग के फील्ड अधिकारी श्री परिहार पर गंभीर आरोप लग रहे हैं कि किस प्रकार से अवैध लोग अपनी अवैध बीज दुकान को संचालित कर किसानों से मोटी रकम ऐंठ रहे हैं, जिसके कारण किसान सरकार की उपलब्धता व किसानों के प्रति सजगता से परे है और निरंतर लुटता जा रहा है। खरीफ सीजन की बोवनी शुरू होते ही उमरिया जिले में नकली बीज का काला कारोबार भी शुरू हो गया है। मुनाफाखोर सक्रिय हो गए हैं और सबसे बड़ी बात, कृषि विभाग के अधिकारी मौन हैं।
*क्या है पूरा खेल?*
जिले में हजारों किसान विभाग के जरिए बीज लेते हैं मगर उनका यह प्रयास खेतों की मिट्टी में जाने के बाद धरा का धरा रह जाता है, जिसके बाद यह कहना गलता नहीं होगा कि किस प्रकार से सरकार और किसानों के बीच सेतु का काम करने वाले विभाग के जम्मेदारों ने अपनी जेबें भरने के लिए किसान को केवल कागजी कार्यवाही में उलझा रखा है रही बात बीज की तो सरकार से प्राप्त होने वाले बीज की गुणवत्ता शायद किसानों ने बीते वर्ष ही देख लिया होगा। जिले में लगभग 250 दुकानें खाद और बीज बेचने का काम कर रही हैं मगर उनमें से अधिकांश दुकानों के पास या तो लायसेंस नहीं है और या तो वह नकली बीज बेचकर अपनी जेबें भरने में आमादा हैं।
*एक्सपायरी माल:*
पुराना, एक्सपायरी डेट का बीज नई पैकिंग में बेचा जा रहा है, नकली बिल, लाइसेंस वाली कुछ दुकानें भी नकली बीज का दूसरा स्टॉक रखती हैं और कच्चे बिल पर बेचती हैं।
*किसान की जुबानी*
ग्राम लालपुर के एक किसान ने बताया कि पिछले साल रवि सीजन में चने और मसूर का बीज लिया था, एक भी दाना नहीं उगा, वहीं अब तो धान के बीज पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं, जिसके कारण सरकार को प्रति किसान ओषतन 2-3 हजार रुपए का घाटा हो रहा है।
*कृषि विभाग का क्या रोल?*
नियमानुसार बीज निरीक्षक को हर महीने दुकानों की जांच कर सैंपल लेना होता है, लाइसेंस चेक करना होता है, लेकिन उमरिया में दर्जन भर दुकानें बिना लाइसेंस के चल रही हैं। सवाल ये है कि जब विभाग को पता है कि 100 दुकानें अवैध हैं तो छापा क्यों नहीं मारते? सैंपल फेल होने पर FIR क्यों नहीं होती?
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