गंगेव - मनुष्य को नीति उसके कर्म और धर्म मार्ग पर चलने की शिक्षा देती है पद से भटकते ही वह उन प्रसंगों की ओर इशारा करती है जिससे भटके हुए को मार्ग मिल जाए जिसने उसे समझा उसका दुखद अंत और जिसने समय के रहते हुए स्वयं को संभाल लिया उसका बिगड़ा हुआ जीवन भी सुख में हो जाता है गंगेव में बाबूलाल गुप्ता जी के निज निवास में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में कथा व्यास आनंद भूषण जी महाराज जी ने अजामिल प्रहलाद और बाल भक्त ध्रुव का वृत्तांत सुनाकर संयुक्त परिवार वसुधैव कुटुंबकम की भावना को सनातन परंपरा से जुड़ा पौराणिक कथाओं के साथ ही वर्तमान समाज को ध्यान में रखकर उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि किसी हाल में बुजुर्गों को वृद्ध आश्रम नहीं पहुंचाया जाना चाहिए यह भागवत कथा में आज का संकल्प होना चाहिए कथा में अजामिल का चरित्र बताते हुए उन्होंने कहा कि वह किसी भी हाल में सद भक्ति का पात्र नहीं था लेकिन संतों और महात्माओं की ऐसी कृपा हुई कि उसने एक बात मानी अपने बेटे का नाम ही नारायण रख दिया अंत समय उसने नारायण नारायण नाम लेकर पुकारा और साक्षात नारायण उसके समक्ष थे अंतिम दिनों में उसके मुख से लिया गया नाम भी नारायण ही था लेकिन संतो और महात्माओं की ऐसी कृपा हुई कि उसने एक बात मानी अपने बेटे का नाम भी नारायण रख दिया अंत समय उसने नारायण नारायण नाम लेकर पुकारा और साक्षात नारायण उसके सम्मुख आ गए अंतिम दिनों में उसके मुख से लिया गया नारायण नाम ही उसकी मुक्ति का कारण बन गया जिसका प्रसंग कथा व्यास जी ने विस्तार से सुनाया कथा के अन्य भागों के साथ ही स्थानीय बच्चों ने विभिन्न रूप धारण करते हुए झांकियां प्रस्तुत की जिसे दर्शकों ने पूरे मनोयोग से आत्मसात किया कथाओं को समझाने और अपने जीवन में उतारने के लिए आयोजकों ने जिस प्रकार प्रसंग से संबंधित झांकियों का प्रदर्शन किया उससे सुंदरता और दर्शकों में हर दिन उत्सुकता बनी रहती है।