गोवंश संरक्षण के लिए देशव्यापी अभियान: 'गो सम्मान आह्वान' की शुरुआत

केसली (मप्र) - भारतीय संस्कृति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली 'वेदलक्षणा गोवंश' को संवैधानिक संरक्षण दिलाने के लिए एक व्यापक अभियान 'गो सम्मान आह्वान' शुरू हो चुका है। इस अभियान में देश भर के सजग नागरिक, संत समाज और गोभक्त महामहिम राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर गोवंश को संवैधानिक दर्जा दिलाने की मांग कर रहे हैं। इसी तारतम्य में केसली में गौभक्तों ने महामहिम राष्ट्रपति के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा है।

राष्ट्रपति के 'गोपूजन' से मिली नई चेतना

महामहिम राष्ट्रपति द्वारा मार्च 2026 में ब्रज क्षेत्र (वृंदावन) के प्रवास के दौरान किए गए 'गोपूजन' और गोवंश को 'जीवनधन' कहकर संबोधित करने से इस अभियान को नई प्रेरणा मिली है। संत समाज का मानना है कि राष्ट्र के सर्वोच्च पद पर आसीन व्यक्ति की यह श्रद्धा गोमाता को उनकी खोई हुई प्रतिष्ठा वापस दिला सकती है।

अभियान की मुख्य मांगें

  • राष्ट्रमाता का दर्जा: अखिल भारतीय वेदलक्षणा गोवंश को 'राष्ट्रमाता' या 'राष्ट्र आराध्या' का संवैधानिक दर्जा प्रदान करना।
  • केंद्रीय गोसेवा मंत्रालय: गोवंश के संरक्षण और संवर्धन के लिए एक समर्पित केंद्रीय मंत्रालय की स्थापना।
  • एकीकृत केंद्रीय कानून: संपूर्ण भारत में गोवंश के संरक्षण के लिए एक समान और प्रभावी केंद्रीय कानून का निर्माण।

संविधान के अनुच्छेद 48 और 51A(g) का हवाला

ज्ञापन में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 48 और 51A(g) का जिक्र किया गया है, जो राज्य को आधुनिक कृषि और पशुपालन प्रणालियों को संगठित करने तथा गायों के वध पर रोक लगाने का निर्देश देता है। साथ ही, यह जीवों के प्रति दया भाव रखना प्रत्येक नागरिक का मूल कर्तव्य बताता है।

क्यों आवश्यक है 'गो संरक्षण'?

  • ग्रामीण अर्थव्यवस्था: देशी गोवंश भारतीय कृषि और जैविक खेती का मुख्य आधार है।
  • सांस्कृतिक पहचान: वेदों और शास्त्रों में गोवंश को पूजनीय माना गया है।
  • पर्यावरण संतुलन: प्राकृतिक खेती और मृदा स्वास्थ्य के लिए गोवंश अनिवार्य है।

देशवासियों ने धारा 370 की समाप्ति जैसे साहसिक कार्यों का उदाहरण देते हुए आशा व्यक्त की है कि महामहिम राष्ट्रपति के मार्गदर्शन में गोवंश को संवैधानिक सुरक्षा प्रदान की जाएगी। 'गो सम्मान आह्वान अभियान' अब मात्र एक मांग नहीं, बल्कि जन-आंदोलन का रूप ले चुका है।