मालवा के सूफी बुजुर्ग हजरत ख्वाजा आबू सईद शहीद के उर्स में उमड़ा अकीदतमंदों का सैलाब

जावरा: मालवा की पवित्र धरती पर सूफी परंपरा और भाईचारे का प्रतीक माने जाने वाले हजरत ख्वाजा आबू सईद शहीद रहमतुल्लाह अलैह के चार दिवसीय उर्स मुबारक के अवसर पर दरगाह परिसर में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। जुमेरात कमेटी द्वारा आयोजित इस उर्स के अंतर्गत देर रात भव्य कव्वाली कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें देशभर से आए जायरीन और स्थानीय लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

कार्यक्रम में मुंबई से आए मशहूर कव्वाल अजीम नाजा ने अपने सूफियाना कलाम और मनकबतों से ऐसा समां बांधा कि उपस्थित श्रद्धालु देर रात तक झूमते रहे। उन्होंने अपने प्रसिद्ध कलाम "आज तकदीर संवर जाने दो" सहित कई सूफियाना प्रस्तुतियां दीं, जिन्हें सुनकर महफिल में मौजूद लोगों ने खूब दाद दी। कव्वाली के दौरान पूरा वातावरण इश्क-ए-रसूल और सूफियाना रंग में रंगा नजर आया।

रात करीब चार बजे तक चली इस रूहानी महफिल में जायरीन और सूफी प्रेमियों की भारी भीड़ मौजूद रही। कार्यक्रम में बाहर से आए सूफी संतों, मेहमानों और जायरीन का स्वागत साफा बांधकर एवं फूलों की मालाएं पहनाकर किया गया।

उर्स मुबारक के दौरान दरगाह परिसर में धार्मिक आस्था, भाईचारे और मोहब्बत का अनूठा संगम देखने को मिला। दूर-दराज़ क्षेत्रों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने दरगाह पर हाजिरी देकर मुल्क में अमन, चैन, तरक्की और खुशहाली की दुआएं मांगीं।

इस अवसर पर दरगाह के सरपरस्त गबरू बाबा, शफात रसूल एडवोकेट, मकबूल हुसैन (मिट्ठू भाई), कार्यक्रम संयोजक सुल्तान हुसैन, सदर शारुख हुसैन, नायब सदर नेहरू भाई, रईस भाई, मुन्नी भाई, भुरू भाई सहित जुमेरात कमेटी के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे।

उर्स मुबारक के आगामी कार्यक्रमों को लेकर भी श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखा जा रहा है। कमेटी द्वारा जायरीन की सुविधाओं के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं, जिससे बाहर से आने वाले मेहमानों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। चार दिवसीय उर्स के दौरान दरगाह परिसर पूरी तरह रौशनियों से जगमगा रहा है और हर ओर सूफियाना कलामों की गूंज सुनाई दे रही है।

आज सदाकत सबरी अपने कलाम पेश करेंगे, जबकि 12 जून को मुकर्रम वारसी और शब्बू शादाब के बीच मुकाबला होगा।