गढ़ाकोटा। सागर जिले के गढाकोटा स्थित चौधरी जैन मंदिर धर्मशाला में प्राकृत भाषा विकास फाऊंडेशन एवं दिगंबर जैन गोलापूर्व मंदिर प्रबंधक कमेटी के संयुक्त तत्वावधान प्राकृत विद्या शिक्षण शिविर का उत्साहपूर्वक आयोजन हो रहा है जिससे समाज में धर्म प्रभावना का माहौल बना हुआ है। महिला मंडल,बालिका मंडल पाठशाला परिवार एवं सभी समाज जन इतनी तेज गर्मी में भी सुबह,दोपहर एवं शाम को उत्साहपूर्वक भाग ले रहे हैं। सागर से आई हुई विदुषी बहिन श्रीमती अनीता'छाया'एवं सोनिका'फुटेरा'प्राकृत बोध, द्रव्य संग्रह,गुण स्थान विज्ञान, समय विज्ञान जैसे धार्मिक शास्त्रों के साथ-साथ विभिन्न प्रतियोगिता एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से धर्म प्रभावना कर रही है । इसी संदर्भ में श्रीमती साक्षी जैन 'ऊटखेरे' को द्रव्यसंग्रह की गाथाएं सुनाने पर पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
विदुषी बहिन श्रीमती अनीता'छाया'ने प्राकृत भाषा का महत्व बताते हुए कहा कि यह भाषा भारत की सांस्कृतिक विरासत,जैन धर्म की साहित्यिक और आधुनिक भारतीय भाषाओं की उत्पत्ति का मुख्य आधार रही है। जैन धर्म के अधिकांश प्राचीन आगम ग्रंथ और उपदेशों की इसी भाषा में रचना हुई है। इसके माध्यम से धर्म और दर्शन को आम जनता तक पहुंचाना संभव हो सका है। महामंत्र 'णमोकार-मंत्र भी प्राकृत भाषा में लिखा गया है। अतः प्राकृत भाषा के प्रति हमारा सहज झुकाव एवं आकर्षण होना चाहिए एवं इसका संरक्षण एवं संवर्धन करना चाहिए। साथ ही श्रुत पंचमी पर्व को' श्रुत पंचमी प्राकृत भाषा दिवस' के रूप में मनाने की भारत सरकार से अनुरोध करना चाहिए। शिविर को सफल बनाने में विमल चौधरी,आदेश सेठ,प्रवीण सिंघई,नीलेश चौधरी,अहमेन्द्र चौधरी,दीपा चौधरी,आभा गोदरे,रक्षा सिंघई,दिया चौधरी एवं सभी महिला मंडल, बालिका मंडल,पाठशाला परिवार का विशेष सहयोग प्राप्त हो रहा है।

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