चमत्कारिक श्री हनुमान मंदिर ‘हनुमान लोक’ जामसांवली धाम में हनुमान जन्मोत्सव के पावन अवसर पर आयोजित दिव्य रामकथा के दूसरे दिन भक्ति और ज्ञान की त्रिवेणी बही। विश्व विख्यात पद्मविभूषण तुलसीपीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामभद्राचार्य महाराज ने अपनी ओजस्वी वाणी से भगवान श्रीराम की बाल्यावस्था, गुरुकुल जीवन और आदर्श संस्कारों का ऐसा मार्मिक वर्णन किया कि संपूर्ण पंडाल मंत्रमुग्ध हो गया। कथा पूर्व जगद्गुरु ने हनुमान जी के दर्शन कर विश्व कल्याण की कामना की।

रामलला का प्राकट्य और ‘राघव’ नामकरण

​कथा के दौरान भगवान श्रीराम के जन्म का प्रसंग जीवंत हो उठा। मंच पर एक नन्हे बालक को ‘रामलला’ के स्वरूप में लाया गया, जिसे देख श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए। पूज्य जगद्गुरु ने वात्सल्य भाव से उस बालक का नामकरण ‘राघव’ किया। इस दौरान ‘जय श्रीराम’ और ‘जय हनुमान’ के जयघोष से आकाश गुंजायमान हो उठा।

जीवन के पांच स्वरूपों की दिव्य व्याख्या

​जगद्गुरु ने चौपाइयों के माध्यम से समझाया कि जहाँ भगवान का संग होता है, वहाँ धर्म और मर्यादा स्वतः आ जाते हैं। उन्होंने श्रीराम की लीलाओं को पांच स्वरूपों में परिभाषित किया जिसमें ​संस्कार लीला: बाल्यकाल और गुरुकुल की नींव।​शृंगार लीला: सीता स्वयंवर और दांपत्य आदर्श।​विहार लीला: वनवास के दौरान सेवा और त्याग।​संहार लीला: अधर्म का नाश और सत्य की विजय।​राज्याभिषेक लीला: आदर्श शासन (रामराज्य) की स्थापना।

​परिसर में बनेगा भव्य राम-सीता मंदिर

​महाराजश्री ने उद्घोष किया कि हनुमान जी के बिना राम अधूरे हैं और राम के बिना हनुमान।” उन्होंने मंदिर संस्थान से परिसर में भगवान श्रीराम-सीता के भव्य मंदिर निर्माण का आह्वान किया। उनके अनुरोध पर संस्थान अध्यक्ष गोपाल शर्मा, संदीप मोहोड, सचिव टीकाराम कारोकार, एड. अजय धवले, दादाराव बोबडे और संतोष डवरे ने मंदिर निर्माण का संकल्प लिया। इस अवसर पर रंगोली कलाकार पूजा चौहान का सम्मान भी किया गया।