ओंकारेश्वर 

तीर्थ नगरी ओंकारेश्वर में हनुमान प्रकट उत्सव श्रद्धा, उल्लास और भक्ति के अद्भुत संगम के रूप में मनाया गया ।

भगवान भोलेनाथ की इस पावन नगरी में हनुमान जी को शिव का अंश माना जाता है, जिसके चलते पूरे क्षेत्र में धार्मिक आस्था का विशेष वातावरण देखने को मिला।

बुधवार रात से ही मठ-मंदिरों में विशेष साज सज्जा के साथ हवन-पूजन, विशेष आहुतियां, भजन-कीर्तन, कन्या भोज एवं विशाल भंडारों का आयोजन शुरू हो गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिरों में पहुंचकर हनुमान जी के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया।

ओंकारेश्वर के प्राचीन पांडव कालीन लेटे हनुमान मंदिर, जहां हनुमान जी लेटी हुई मुद्रा में विराजमान हैं, वहां विशेष पूजन-अर्चन एवं आकर्षक सजावट की गई। इस सिद्ध स्थल पर भक्तों की विशेष आस्था देखने को मिली।

वहीं जोड़ गणपति हनुमान मंदिर में भी दिनभर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। मंदिर परिसर “जय श्रीराम” "जय जय हनुमान” के जयकारों से गूंजता रहा।

पूरे क्षेत्र में जगह-जगह भंडारे एवं प्रसादी वितरण का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। संतों के भजन-कीर्तन और सत्संग से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।

 

  *महंत पवन चैतन्य महाराज* “ओंकारेश्वर भगवान शिव की पावन नगरी है और हनुमान जी स्वयं शिव के ही अंश हैं। इस पावन अवसर पर भक्तों का जो उत्साह और श्रद्धा देखने को मिल रही है, वह अद्भुत है। यहां आने वाले हर श्रद्धालु को हनुमान जी की कृपा अवश्य प्राप्त होती है।”

 

 *विक्की वर्मा (पुजारी, लेटे हनुमान मंदिर)* “हनुमान प्रकट उत्सव पर विशेष पूजा-अर्चना, अभिषेक और श्रृंगार किया गया है। दूर-दूर से श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। यह सिद्ध स्थल है, जहां सच्चे मन से की गई हर प्रार्थना पूर्ण होती है।”

 

हनुमान प्रकट उत्सव के अवसर पर पूरी तीर्थ नगरी “जय श्रीराम” के जयघोष से गुंजायमान हो उठी, जिससे ओंकारेश्वर एक बार फिर आस्था और भक्ति के रंग में रंगा नजर आया।