जैन मुनियों का सतना में भव्य स्वागत: मुनि श्री हेम शेखर जी का प्रेरक प्रवचन

सतना, कटरा: जैन मुनियों की कठिन साधना और तपस्या के कारण वे समाज में ईश्वर के संदेशवाहक माने जाते हैं। जैन मुनि जिस मार्ग से गुजरते हैं, वहां हर धर्म, जाति और संप्रदाय के लोग आस्था के साथ नतमस्तक होकर उनका सम्मान करते हैं।

देश के विख्यात जैन संत पूज्य मुनिराज श्री हेम शेखर जी महाराज अपने शिष्य मुनिराज हेत शेखर जी एवं मुनिराज हेताशं शेखर जी के साथ कटरा के वार्ड 1 में स्थित मातृछाया जैन भवन पहुंचे। यहां उनका भव्य स्वागत किया गया। कीर्ति कामदार, प्रवीणचंद्र कामदार, संजय कामदार, और दिलीप कामदार समेत सतना से आए जैन समाज के भाई-बहनों और नगरवासियों ने मुनि श्री की अगवानी की।

चेतना के बल पर भवसागर से पार उतरना संभव

जैन भवन में महाराज जी का प्रवचन कार्यक्रम सुबह 11 बजे से प्रारंभ हुआ। इस दौरान महाराज श्री ने कहा कि परमात्मा ने हमें इंसान क्यों बनाया है, यह समझना आवश्यक है। धनवान होना हमारे पुण्य प्रताप का फल होता है। दुनिया में मेहनत सभी करते हैं, लेकिन विशेष लोगों पर परमात्मा की कृपा सिर्फ पुण्य प्रताप के बल पर होती है।

मुनि श्री ने कहा कि जो जन्मा है, उसका एक दिन जाना तय है। जन्म के समय शिशु रोता है और जग हंसता है, इसका अर्थ है कि कर्म ऐसे करें कि हम हंसते हुए ऊपर जाएं और जग हमारे जाने पर रोए। हमारे काम से किसी को नुकसान नहीं होना चाहिए। जीवन जीने का तरीका ऐसा हो कि हमारे हर काम से दूसरों का भला हो जाए और हम परोपकार करते रहें।

प्रवचन के समापन के उपरांत जिले भर से आए शिष्यगण ने भंडारे का प्रसाद ग्रहण किया। मुनि श्री के प्रवचन के दौरान नगर के गणमान्य नागरिक और शिष्यगण उपस्थित रहे।