केसली क्षेत्र में बदलते मौसम से किसान चिंतित: गेहूं की फसल पर संकट

फरवरी का महीना समाप्त होते ही सागर जिले के केसली क्षेत्र में मौसम के बदलते मिजाज ने किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। इस समय क्षेत्र में गेहूं की फसल दो अलग-अलग चरणों में खड़ी है। जहां अगेती बोवनी करने वाले किसान फसल पकने की स्थिति देखकर खुश हैं, वहीं मक्का की खेती के चक्कर में गेहूं की पिछेती बोवनी करने वाले किसान बढ़ते तापमान को देखकर अपनी उपज को लेकर आशंकित हैं।

बोवनी के समय में अंतर बना मुसीबत

इस वर्ष केसली क्षेत्र के फसल चक्र में बड़ा बदलाव देखा गया। खरीफ सीजन के दौरान किसानों ने बड़े पैमाने पर मक्का का रकबा बढ़ाया था, जिसके कारण गेहूं की बोवनी में काफी विलंब हुआ।

  • अगेती बोवनी: जिन किसानों के खेत खाली थे, उन्होंने 15 अक्टूबर के आसपास बोवनी कर दी थी। उनकी फसल अब पकने की कगार पर है।
  • पिछेती बोवनी: मक्का उत्पादक किसानों के खेतों में गेहूं की बोवनी दिसंबर के अंतिम सप्ताह तक चली। वर्तमान में इन पौधों में केवल बालियां ही आना शुरू हुई हैं।

बढ़ते तापमान से 'दाना' पड़ सकता है पतला

स्थानीय कृषि जानकारों और किसानों के अनुसार, फरवरी माह के दूसरे सप्ताह से ही तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। यह गर्मी उन फसलों के लिए घातक है जो अभी बालियां छोड़ रही हैं।

"तापमान बढ़ने से दाना भरने की प्रक्रिया (Milking Stage) प्रभावित होती है। यदि गर्मी इसी तरह बढ़ती रही, तो गेहूं का दाना पूरी तरह पुष्ट नहीं हो पाएगा और उपज में गिरावट आ सकती है।" - स्थानीय किसान

सिंचाई और जलस्तर का दोहरा संकट

पिछेती फसल को बचाने के लिए किसान दिन-रात सिंचाई में जुटे हैं, लेकिन यहां भी चुनौतियां कम नहीं हैं।

  • गिरता जलस्तर: गर्मी शुरू होते ही कुओं और नलकूपों का जलस्तर तेजी से नीचे जा रहा है।
  • मक्का का दोहरा नुकसान: किसानों का कहना है कि इस साल उन्हें दोहरी मार झेलनी पड़ी है। पहले मक्का के सही दाम नहीं मिले और अब मक्का के कारण गेहूं की फसल पर भी संकट मंडरा रहा है।

किसानों के लिए सलाह

विशेषज्ञों का मानना है कि जिन खेतों में बालियां आ रही हैं, वहां नमी बनाए रखना अनिवार्य है। हल्की सिंचाई करें लेकिन तेज हवाओं का ध्यान रखें ताकि फसल आड़ी न गिरे।

किसानों के लिए यह समय चुनौतीपूर्ण है, और उन्हें मौसम की परिस्थितियों के अनुरूप अपनी रणनीतियों को समायोजित करने की आवश्यकता है।