शहडोल जिले में कानून व्यवस्था चरमराई!
अमलाई में अवैध शराब माफिया का आतंक, पुलिस की खामोशी पर सवाल; कांग्रेस की कड़ी चेतावनी
अमलाई। शहडोल जिले के अमलाई थाना क्षेत्र में अवैध शराब का कारोबार कानून और प्रशासन के लिए गंभीर चुनौती बन गया है। गली-गली और मोहल्ले-मोहल्ले में खुलेआम शराब की बिक्री और खपत ने क्षेत्र के सामाजिक वातावरण को विषाक्त कर दिया है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि नाबालिग बच्चे भी नशे की चपेट में आने लगे हैं। महिलाओं, बुजुर्गों और सम्मानित परिवारों का घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है।
इस गंभीर स्थिति को लेकर ब्लॉक कांग्रेस कमेटी बुढ़ार और मंडलम कांग्रेस अमलाई ने मोर्चा खोलते हुए स्थानीय पुलिस को तीखी चेतावनी दी है।
ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष अंकित सिंह और मंडलम अध्यक्ष ओंकार सिंह के नेतृत्व में पुलिस को सौंपे गए ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि क्षेत्र में अवैध शराब का धंधा राजनीतिक संरक्षण में फल-फूल रहा है। ज्ञापन में कहा गया कि शराब माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्हें न कानून का भय है और न पुलिस कार्रवाई की चिंता। इससे आम जनता में भारी आक्रोश व्याप्त है।
- धनपुरी वार्ड क्रमांक 10 का टंडन मोहल्ला अमराउण्डी
- वार्ड क्रमांक 7 की छोटी अमलाई एवं बकहो क्षेत्र
- रावल मार्केट, चौधरी मोहल्ला, पीपल चौक
- दुर्गा स्टेज के पीछे तथा वार्ड क्रमांक 1 में शंकर मंदिर के सामने का क्षेत्र
इन इलाकों में दिन-रात शराबियों का जमावड़ा लगा रहता है और पुलिस सब कुछ जानते हुए भी मौन बनी हुई है। क्षेत्रीय नागरिकों का कहना है कि शराब के नशे में धुत लोग सार्वजनिक स्थानों पर अभद्रता करते हैं, महिलाओं और युवतियों पर फब्तियां कसते हैं तथा आए दिन गाली-गलौज और विवाद की घटनाएं सामने आती हैं। माता-पिता अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं, क्योंकि मोहल्लों का माहौल लगातार बिगड़ता जा रहा है।
ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष अंकित सिंह ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि अवैध शराब के इस नेटवर्क पर तत्काल रोक नहीं लगाई गई और माफियाओं के खिलाफ कठोर कार्रवाई नहीं हुई, तो कांग्रेस पार्टी सैकड़ों कार्यकर्ताओं और महिलाओं के साथ उग्र आंदोलन करेगी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अमलाई थाने का घेराव किया जाएगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।
ज्ञापन की प्रतिलिपि पुलिस अधीक्षक शहडोल एवं एसडीओपी बुढ़ार को भी भेजी गई है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पुलिस प्रशासन इस चेतावनी के बाद जागेगा, या फिर अवैध शराब माफियाओं का यह काला कारोबार यूँ ही प्रशासनिक संरक्षण में चलता रहेगा।

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