उमरिया जिले में भ्रष्टाचार का एक नया मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक तंत्र को हिला कर रख दिया है। मध्यप्रदेश डे राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की जिला प्रबंधन इकाई में वित्तीय अनियमितताओं का बड़ा खुलासा हुआ है। जांच के बाद जिला प्रबंधक (कृषि) एवं प्रभारी जिला प्रबंधक (वित्त) महेंद्र कुमार बारसकर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।

दोहरे भुगतान का खेल:

  • जांच में पाया गया कि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की योजनाओं के अंतर्गत प्रशिक्षण व्यय और मानदेय के नाम पर पहले स्वीकृत राशि का भुगतान किया गया।
  • इसके बाद उसी स्वीकृति आदेश का सहारा लेकर फिर से भुगतान कर दिया गया।
  • सरकारी खजाने को 1,43,440 रुपये की सीधी चपत लगी।
  • बिना किसी सक्षम स्वीकृति के 1,36,683 रुपये का भुगतान कर दिया गया।

कुल 2,80,123 रुपये के गबन का मामला:

यह पूरा खेल तब उजागर हुआ जब जिला मिशन प्रबंधन इकाई का आंतरिक निरीक्षण किया गया। वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान बिल-वाउचर, कैश बुक, लेजर, व्यय पंजी और बैंक स्टेटमेंट का मिलान किया गया।

आरोपी अधिकारियों पर कार्रवाई:

विभाग ने आरोपी अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया और जवाब देने का अवसर दिया। जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाने पर, मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत उमरिया ने एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए।

पुलिस जांच में जुटी:

उमरिया थाना प्रभारी मदनलाल मरावी के अनुसार, आरोपी द्वारा फर्जी बिल और वाउचर के आधार पर शासकीय राशि निकाले जाने के प्रमाण मिले हैं। अपराध क्रमांक 49/26 धारा 316(5) बीएनएस के तहत मामला पंजीबद्ध किया गया है। फिलहाल गिरफ्तारी नहीं हुई है, लेकिन मामले की गहन जांच जारी है।

ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से चलाई जा रही आजीविका मिशन जैसी योजना में भ्रष्टाचार न सिर्फ सरकारी तंत्र की कमजोरी उजागर करता है, बल्कि यह भी सवाल खड़ा करता है कि आखिर कब तक कागजों में ईमानदारी और हकीकत में लूट का यह खेल चलता रहेगा। अब देखना यह है कि जांच के बाद दोषियों पर कितनी सख्त कार्रवाई होती है।