बैतूल: यूजीसी कानून के लागू होते ही देशभर में इसके विरोध में आंदोलन हो रहे हैं। बैतूल में सर्व समाज के युवाओं ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से इस कानून को तत्काल प्रभाव से समाप्त करने की मांग की। सौरभ सिंह राघव के नेतृत्व में सैंकड़ों युवाओं ने कलेक्टर बैतूल को ज्ञापन सौंपा।
सरकार पर समाज को बांटने का आरोप इस संबंध में आशीष साहू और सौरभ सिंह राघव ने कहा कि सभी विद्यार्थी बराबरी में जीने में विश्वास रखते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब समाज एक हो रहा है, तब इस तरह के कानून क्यों लाए जा रहे हैं जो जाति का जहर घोलते हैं? ऐसे कानून समाज को जोड़ने के बजाय बांटने का कार्य करते हैं।
क्या है यूजीसी कानून? अधिवक्ता कलश दीक्षित और रजनीश जैन ने बताया कि नए यूजीसी कानून के तहत उच्च शिक्षण संस्थानों में एससी, एसटी और ओबीसी छात्र जातिगत भेदभाव की शिकायत कर सकेंगे। यह कानून 15 जनवरी 2026 से प्रभावी होगा। इसके तहत विश्वविद्यालयों में एक समानता समिति गठित की जाएगी। यह समिति हर छह महीने में यूजीसी को रिपोर्ट भेजेगी। कानून का पालन न करने पर संस्थान को सजा दी जाएगी।
असंतोष और आक्रोष रफी अहमद और आशीष देशमुख ने कहा कि यूजीसी कानून के कारण अगड़ी जातियों में असंतोष है क्योंकि इसका दुरुपयोग हो सकता है। यह युवाओं के बीच खाई पैदा कर सकता है।
कानून वापस न लेने पर चुनावी परिणाम भुगतने की चेतावनी प्रमेश राजपूत और विनीत गोठी ने चेतावनी दी है कि यदि कानून वापस नहीं लिया गया तो सभी समाज के युवा आंदोलन करेंगे और इसका असर चुनावों पर पड़ेगा।
समाज की एकजुटता इस कानून के विरोध में बैतूल में सभी समाज के युवाओं में गुस्सा देखा गया। ज्ञापन सौंपने के दौरान सौरभ सिंह राघव, पंकज मिश्रा, आशीष साहू, रफी अहमद, आशीष देशमुख, कलश दीक्षित और अन्य युवा उपस्थित थे।
Continue With Google
Comments (0)