सीधी के जिला चिकित्सालय में रात करीब 2 बजे एक भयावह घटना हुई जिसने पूरे स्वास्थ्य तंत्र की नींव हिला दी। आईसीयू बच्चा वार्ड की छत की परतें अचानक गिर गईं और सीधे उस बेड पर आ गिरीं, जहां एक नवजात सो रहा था।

यह कोई साधारण घटना नहीं थी, बल्कि मौत से सीधा सामना था। यदि कुछ सेकंड का भी फर्क होता, तो यह खबर एक दर्दनाक हादसे में बदल सकती थी। घटना के बाद वार्ड में अफरा-तफरी मच गई। परिजनों में चीख-पुकार, डर और आक्रोश का माहौल बन गया।

प्रशासन की लापरवाही उजागर

  • क्या जिला चिकित्सालय की इमारत पहले से जर्जर हालत में थी?
  • छत की नियमित जांच क्यों नहीं की गई?
  • क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे या नवजात की बलि का इंतज़ार कर रहा था?

यह घटना स्पष्ट करती है कि जिला चिकित्सालय में केवल इलाज नहीं, बल्कि मरीजों की जिंदगियां भी दांव पर लगी हुई हैं। जहां बच्चों की जान बचाने की जिम्मेदारी है, वहीं लापरवाही से मौत का खतरा मंडरा रहा है।

क्या होगी कार्रवाई?

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर तत्काल कार्रवाई होगी, या फिर हर बार की तरह यह मामला भी जांच के नाम पर ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?

जिला चिकित्सालय में यह हादसा सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि सिस्टम की सड़ांध की डरावनी तस्वीर है। प्रशासन को जल्द से जल्द इस मामले में कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।