ग्राम सहसराम में भारतीय स्टेट बैंक की कियोस्क शाखा से लाखों रुपये की चोरी का मामला पुलिस ने महज 24 घंटे के भीतर सुलझा लिया। इस त्वरित कार्रवाई ने ग्रामीणों में सुरक्षा का विश्वास बढ़ाया है और नवागत थाना प्रभारी की सक्रिय कार्यशैली की सराहना की जा रही है।
घटना गुरुवार और शुक्रवार की दरमियानी रात की है। गोहरा गांव के निवासी महेश धाकड़, जो भाजपा जिला उपाध्यक्ष परीक्षित धाकड़ के छोटे भाई हैं, सहसराम गांव में लंबे समय से एसबीआई की कियोस्क शाखा का संचालन कर रहे थे। 15 जनवरी की शाम करीब 4 बजे, वे रोजाना की तरह कियोस्क सेंटर बंद करके विजयपुर चले गए थे।
चोरी की घटना और पुलिस की सक्रियता
सुबह करीब 9 बजे जब महेश धाकड़ दुकान पहुंचे तो उन्होंने देखा कि दुकान का दरवाजा खुला है और टेबल की दराज में रखे 1 लाख 20 हजार रुपये गायब हैं। चोरी की सूचना मिलते ही गसवानी थाना प्रभारी निरीक्षक भारत सिंह गुर्जर पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और बारीकी से जांच शुरू की।
थाना गसवानी में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ अपराध प्रकरण दर्ज कर विवेचना प्रारंभ की गई। पुलिस अधीक्षक श्योपुर सुधीर अग्रवाल एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रवीण भूरिया के निर्देशन में, गसवानी पुलिस ने संदेह के आधार पर गांव के दो युवकों को हिरासत में लिया। सघन पूछताछ के दौरान, दोनों ने चोरी की वारदात को स्वीकार कर लिया।
आरोपियों की गिरफ्तारी और रकम की बरामदगी
पुलिस ने आरोपी दर्शन पुत्र रमेश धाकड़ (27 वर्ष) और सौरभ पुत्र रमेश शाक्य (21 वर्ष) को गिरफ्तार किया। आरोपियों की निशानदेही पर चोरी गई रकम में से 1 लाख 4 हजार रुपये बरामद किए गए। दर्शन धाकड़ से 54 हजार रुपये और सौरभ शाक्य से 50 हजार रुपये की रिकवरी हुई है। शेष राशि के संबंध में पूछताछ जारी है।
इस पूरे मामले का खुलासा विजयपुर एसडीओपी राघवेंद्र सिंह तोमर ने किया। उन्होंने पुलिस की त्वरित कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
संगठित टीमवर्क और सायबर सेल की भूमिका
इस कार्रवाई में थाना प्रभारी निरीक्षक भारत सिंह गुर्जर के साथ प्रधान आरक्षक धर्मेंद्र सिंह, जगदीश माझी, आरक्षक शिवजी रावत, रंजीत राठौर, मोहन दांगी, रामलखन धाकड़, रिंकू गोले, राजबल्लभ यादव और सायबर सेल श्योपुर की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
थाना प्रभारी ने बताया कि कियोस्क सेंटर पर चोरी की सूचना मिलते ही पुलिस टीम का गठन कर त्वरित कार्रवाई की गई। संदेह के आधार पर हिरासत में लिए गए आरोपियों से पूछताछ की गई, जिन्होंने चोरी की वारदात स्वीकार की।
इस कार्रवाई ने क्षेत्र में कानून-व्यवस्था को लेकर जन विश्वास को मजबूत किया है।

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