सिवनी -:
बिजली विभाग कार्यालय के पास बेदखली कार्रवाई के बाद हुई हिंसक झड़प का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। घटना के बाद जहां घंसौर थाना पुलिस की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है, वहीं अब राजस्व अमले और कुछ प्रभावशाली लोगों की भूमिका को लेकर भी क्षेत्र में चर्चाएं तेज हो गई हैं।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार भूमि स्वामी प्रभुदयाल यादव के पुत्र सुशील यादव, जो वर्तमान में धनौरा तहसील में पटवारी के पद पर पदस्थ बताए जाते हैं, घटना से पहले और बाद में लगातार घंसौर थाने के संपर्क में थे। सूत्रों का दावा है कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान सुशील यादव मौके पर मौजूद थे और उनके हस्ताक्षर कथित रूप से मौका पंचनामा में भी दर्ज हैं। ऐसे में चर्चा का विषय यह बना हुआ है कि यदि उनकी पदस्थापना धनौरा तहसील में है तो कार्य समय के दौरान वे घंसौर में किस हैसियत से मौजूद थे।
सूत्रों का कहना है कि राजस्व टीम द्वारा कार्रवाई पूरी कर मौके से लौटने के बाद भी प्रभुदयाल यादव कथित रूप से जेसीबी मशीन और कई लोगों के साथ विवादित भूमि पर पहुंचे। ऐसे में स्थानीय लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि आखिर किसके संरक्षण में यह कार्रवाई आगे बढ़ाई गई।
पीड़ित पक्ष से जुड़े लोगों का आरोप है कि घटना के दौरान प्रभुदयाल यादव के साथ पहुंचे लोगों ने महिलाओं और छोटी बच्चियों के साथ अभद्र व्यवहार किया, गाली-गलौज की तथा मारपीट भी की। सूत्रों के अनुसार मौके पर मौजूद कुछ लोग कथित रूप से नशे की हालत में थे और अधिकारियों तथा कर्मचारियों से अपने संबंधों का हवाला देते हुए प्रभाव दिखा रहे थे। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
घटना के बाद घंसौर पुलिस की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस स्थान पर घंटों तक विवाद और झड़प चलती रही, वह घंसौर थाने से महज आधा किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इसके बावजूद पुलिस के मौके पर पहुंचने में हुई देरी को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं।
उधर घंसौर तहसीलदार अरुण भूषण दुबे की भूमिका को लेकर भी क्षेत्र में चर्चाओं का दौर जारी है। सूत्र बताते हैं कि तहसीलदार पूर्व में धनौरा तहसील में पदस्थ रह चुके हैं। इसी आधार पर कुछ लोग प्रभुदयाल यादव और उनके पुत्र सुशील यादव के साथ उनके पुराने परिचय और संबंधों की चर्चा कर रहे हैं। हालांकि इन दावों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
सूत्रों के अनुसार घटना के बाद घंसौर थाना पुलिस ने केवल एक पक्ष की शिकायत पर कार्रवाई की, जबकि दूसरे पक्ष के आवेदन को तत्काल स्वीकार नहीं किया गया। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि उन्हें देर रात तक थाने में बैठाए रखा गया, लेकिन उनकी शिकायत पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
सूत्रों के अनुसार, घंसौर पुलिस से न्याय नहीं मिलने की शिकायत लेकर पीड़ित पक्ष शनिवार को अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सिवनी श्री दीपक मिश्रा के समक्ष पहुंचा। बताया जा रहा है कि नीलेश श्रीवास्तव, नीतेश, रमाबाई सहित अन्य लोगों ने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को आवेदन सौंपकर घंसौर थाना पुलिस पर एकतरफा कार्रवाई करने का आरोप लगाया है। आवेदन में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, दूसरे पक्ष की शिकायत दर्ज करने तथा घटना के दौरान हुई कथित मारपीट और अभद्रता की जांच कराने की मांग की गई है।
सूत्र यह भी बताते हैं कि पीड़ित पक्ष ने आवेदन में यह आरोप लगाया है कि उनकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया गया, जबकि दूसरे पक्ष की रिपोर्ट पर तत्काल कार्रवाई की गई। अब मामला अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक तक पहुंचने के बाद प्रशासनिक और पुलिस महकमे की अगली कार्रवाई पर क्षेत्र की नजरें टिकी हुई हैं।
क्षेत्र के नागरिकों का कहना है कि यदि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होती है तो बेदखली कार्रवाई, मौके पर मौजूद लोगों की भूमिका, पुलिस की कार्यप्रणाली तथा राजस्व अमले की जिम्मेदारी सहित कई महत्वपूर्ण तथ्यों से पर्दा उठ सकता है।
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