महाविद्यालय में युवाओं ने वक्तव्य के माध्यम से दिखाई प्रतिभा
 

शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय मुलताई में युवा सांसद कार्यक्रम में वक्तव्य कला के माध्यम से "आपातकाल के पचास वर्ष एवं भारतीय लोकतंत्र के लिए सबक" विषय पर विद्यार्थियों द्वारा वक्तव्य कला प्रस्तुत की गई। महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. कमलेश सरिया की अध्यक्षता में तथा पी.एम. कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस बैतूल से पधारे कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि डॉ. युगलकिशोर सरले द्वारा सरस्वती जी एवं स्वामी विवेकानंद जी के छायाचित्र पर पुष्प अर्पित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। प्राचार्य द्वारा विद्यार्थियों को आपातकाल की तत्कालीन समय की जानकारी, सरकार की निरंकुश शासनप्रणाली और तानाशाही के माध्यम से  अकुशल शासन की विस्तृत जानकारी दी गई। प्रो. सरले ने संविधान की सर्वोच्चता और निष्पक्ष न्याय प्रणाली को अपने वक्तव्य में संक्षिप्त रूप में प्रेषित किया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं द्वारा वक्तव्य के माध्यम से अपने विचार प्रेषित किए गए। विद्यार्थियों ने अपने वक्तव्य में आपातकाल की पृष्ठभूमि जिनमें मुख्य रूप से बिहार के जे.पी. आंदोलन, गुजरात में महंगाई और नवनिर्माण आंदोलन का वर्णन किया। साथ ही आपातकाल के प्रभावों जैसे, मौलिक अधिकारों, प्रेस की स्वतंत्रता का हनन और विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारी जैसे विषयों को उद्घाटित किया, साथ ही संविधान की सर्वोच्चता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे विषयों को भी प्रगाढ़ रूप से अपने वक्तव्य में शामिल किया गया। कार्यक्रम के प्रभारी प्रो. प्रकाश कुमार गीते द्वारा कार्यक्रम का सफल संचालन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. डीके कालभोर, प्रो. नरेंद्र हनोते, रासेयो महिला इकाई प्रभारी प्रो. ममता राजपूत, प्रो. पंकज झाड़े, प्रो. प्रियंका भोपते, प्रो. सिद्धार्थ पंडोल, डॉ. रविशंकर शुक्ल, प्रो. कल्पना बिसंदरे विद्यार्थियों में अभिषेक हुरमाड़े, प्रवीण डोंगरे, लक्ष्मण बेले सहित बड़ी संख्या में महाविद्यालय स्टाफ और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।