उच्च न्यायालय से राहत: शिक्षिका राजकुमारी लोधी की नौकरी बहाल
गौरझामर (सागर) - मध्य प्रदेश के सागर जिले के शासकीय उच्चतर माध्यमिक (कन्या) विद्यालय, गौरझामर की उच्च माध्यमिक शिक्षिका श्रीमती राजकुमारी लोधी को उच्च न्यायालय, जबलपुर पीठ से बड़ी राहत मिली है। आयुक्त, लोक शिक्षण संचालनालय (DPI), भोपाल द्वारा त्रुटिपूर्ण विकलांगता प्रमाण-पत्र के आधार पर जारी बर्खास्तगी आदेश पर न्यायालय ने रोक लगा दी है। इस आदेश के बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने श्रीमती लोधी को पुनः कार्यभार ग्रहण करने की अनुमति दी है।
आर्थिक तंगी और शारीरिक असमर्थता के बीच आया बर्खास्तगी का आदेश
प्राप्त जानकारी के अनुसार, श्रीमती राजकुमारी लोधी गंभीर आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रही थीं और शारीरिक रूप से चलने-फिरने में असमर्थ थीं। उन्हें 22 जून 2026 को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था, जिसके बाद उन्होंने मध्यप्रदेश राज्य कर्मचारी संघ और शिक्षक संगठनों से सहायता की गुहार लगाई। सेवा से बर्खास्तगी के बाद उन्होंने अपनी समस्या मध्यप्रदेश राज्य कर्मचारी संघ के प्रदेश मंत्री राकेश श्रीवास्तव, राज्य कर्मचारी संघ के कार्यकारी जिला अध्यक्ष अरुण कुमार दुबे एवं मध्यप्रदेश शिक्षक संघ के भरत सिंह राजपूत के समक्ष रखी।
संगठनों का समर्थन और न्यायालय में याचिका
कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों ने मामले का गहन अध्ययन कर जबलपुर उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर की। वरिष्ठ अधिवक्ता के.सी. गिडियाल और शिवम मिश्रा ने न्यायालय में शिक्षिका का पक्ष मजबूती से प्रस्तुत किया। उक्त तर्कों के आधार पर न्यायालय ने बर्खास्तगी आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगाते हुए शिक्षिका के पक्ष में स्थगन आदेश जारी किया।
पुनः कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश
उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में, जिला शिक्षा अधिकारी सागर, अरविंद जैन ने 11 अगस्त 2026 को आदेश जारी कर श्रीमती राजकुमारी लोधी को गौरझामर के कन्या विद्यालय में पुनः कार्य करने की अनुमति प्रदान की।
संगठन की प्रतिक्रिया और शिक्षिका का आभार
संगठनों ने इस सफलता पर हर्ष व्यक्त किया और कहा कि विषम परिस्थितियों से जूझ रही दिव्यांग शिक्षिका की मदद करना उनका नैतिक दायित्व था। श्रीमती लोधी ने संगठन, अधिवक्ताओं और जिला शिक्षा अधिकारी के प्रति आभार व्यक्त किया और कहा कि इस कठिन दौर में उन्हें संबल मिला।
- न्यायालय का फैसला: शिक्षिका के बर्खास्तगी आदेश पर रोक।
- संगठनों की भूमिका: न्याय दिलाने में अहम योगदान।
- शिक्षिका का आभार: सभी सहयोगियों का धन्यवाद।
इस घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया कि अन्याय के खिलाफ संगठित प्रयासों से न्याय की उम्मीद की जा सकती है।
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