आलोट। हरिजन कन्या छात्रावास में छात्राओं के वीडियो बनाए जाने के मूल विवाद के बाद मामला अब एक बार फिर सड़क पर पहुंच गया। अधीक्षिका निर्मला भाभर को हटाने की मांग को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के कार्यकर्ताओं द्वारा प्रदर्शन और चक्काजाम किए जाने के दौरान करीब पांच छात्राओं के सड़क पर धरने में बैठने की बात सामने आई है। घटनाक्रम के बाद छात्रावास और स्कूल प्रबंधन की भूमिका को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
बताया गया कि धरने में शामिल पांच छात्राओं में से दो को उनके परिजन मौके पर पहुंचे और अपने साथ ले गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, परिजन इस बात को लेकर नाराज थे कि छात्राओं को पढ़ाई के लिए भेजा गया था, वे सड़क पर चल रहे धरने में कैसे पहुंच गईं। हालांकि, छात्राओं को परिजन द्वारा मारपीट कर ले जाने के दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
प्राचार्य ने कहा—कहीं और ले जाने की बात कही गई थी
स्कूल प्रबंधन के अनुसार, कुछ छात्राओं को कहीं और ले जाने की बात कहकर बाहर ले जाया गया था। बाद में जानकारी मिली कि वे सड़क पर चल रहे धरने में बैठी हैं। प्राचार्य ने पूरे घटनाक्रम को गंभीर मानते हुए संबंधित पक्ष से लिखित जवाब लिए जाने की बात कही है।
दो छात्राओं के मौके से चले जाने के बाद धरना स्थल पर तीन छात्राएं रह गईं। इसी दौरान प्रशासन की ओर से नायब तहसीलदार हेमलता डिंडोरी छात्रावास पहुंचीं और वहां छात्राओं से बातचीत कर पूरे मामले की जानकारी लेने का प्रयास किया।
छात्राओं ने बताया—मूल विवाद वीडियो बनाए जाने का
छात्रावास में मौजूद छात्राओं ने प्रशासन के समक्ष आरोप लगाया कि पूरा विवाद उस घटना के बाद शुरू हुआ, जब प्री-मैट्रिक बालक छात्रावास से जुड़े कर्मचारी करण सिंह जाट द्वारा छात्रावास परिसर में छात्राओं के वीडियो बनाए जाने की बात सामने आई थी।
छात्राओं के अनुसार, अधीक्षिका निर्मला भंवर ने छात्राओं की सुरक्षा और निजता को देखते हुए वीडियो बनाने का विरोध किया था। उनका आरोप है कि विरोध के बाद विवाद बढ़ा और कथित रूप से गाली-गलौज व धमकी देने की स्थिति बनी। इसके बाद अधीक्षिका द्वारा आलोट थाने में आवेदन दिए जाने की बात भी सामने आई है।
विधानसभा तक पहुंच चुका है मामला
इससे पहले मामले की खबरें प्रकाशित होने के बाद मंदसौर विधायक विपिन जैन ने विधानसभा में छात्रावास परिसर में छात्राओं के वीडियो बनाए जाने और उनकी सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए सरकार से कार्रवाई को लेकर जवाब मांगा था।
अब छात्राओं का आरोप है कि मूल शिकायत की जांच से ध्यान हटाने के लिए मामले को अलग दिशा दी जा रही है। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि जांच के रिकॉर्ड से ही हो सकेगी।
जांच की निष्पक्षता पर भी सवाल
शुक्रवार को विभागीय आयुक्त प्रियंका राही छात्रावास पहुंची थीं। छात्राओं ने आरोप लगाया कि छात्रावास में करीब 50 बालिकाएं होने के बावजूद जांच में सभी संबंधित छात्राओं के स्वतंत्र बयान नहीं लिए गए और चुनिंदा छात्राओं के बयान के आधार पर प्रक्रिया पूरी की गई।
छात्राओं ने कलेक्टर से मांग की है कि पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए। उनका कहना है कि मूल शिकायत, पुलिस आवेदन, उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज, संबंधित छात्राओं के बयान और शुक्रवार की जांच की पूरी प्रक्रिया को जांच में शामिल किया जाना चाहिए।
अब सवाल सड़क जाम और छात्राओं की मौजूदगी पर भी
मामला अब केवल अधीक्षिका के खिलाफ लगाए गए आरोपों तक सीमित नहीं रह गया है। पांच छात्राएं धरने में कैसे पहुंचीं, उन्हें किसकी अनुमति से छात्रावास से बाहर ले जाया गया और सड़क जाम के दौरान नाबालिग छात्राओं को धरने में बैठाने की परिस्थितियां क्या थीं—इन सवालों का जवाब भी प्रशासन को तलाशना होगा।
छात्रावास की छात्राओं की सुरक्षा और शिक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। विवाद का समाधान सड़क पर दबाव बनाकर नहीं, बल्कि सभी पक्षों को सुनकर निष्पक्ष जांच और कानून के अनुसार कार्रवाई से होना चाहिए। अब देखना यह है कि प्रशासन मूल वीडियो विवाद के साथ-साथ चक्काजाम में छात्राओं की मौजूदगी के मामले को भी जांच के दायरे में शामिल करता है या नहीं।
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