टीकमगढ़: विकास के दावों को ठेंगा दिखाता रानीपुरा का देसी जुगाड़ पुल
दित्यपाल राजपूत
टीकमगढ़ जिले के मोहनगढ़ स्थित रानीपुरा गांव में विकास की असलियत सामने आई है, जहां पुल के अभाव में ग्रामीणों ने खुद ही ड्रम, रस्सी और बांस का उपयोग कर एक देसी लक्ष्मण झूला बना डाला है। इस जुगाड़ के सहारे बच्चे स्कूल जा रहे हैं, मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं, और किसान अपने खेत तक पहुंच रहे हैं।
- रानीपुरा गांव में लंबे समय से पक्के पुल की मांग की जा रही थी, लेकिन प्रशासन की अनदेखी जारी रही।
- ग्रामीणों ने खुद की पहल से एक खतरनाक जुगाड़ पुल तैयार किया, जो उनकी दैनिक जरूरतों का सहारा बना है।
- इस जुगाड़ के कारण किसी भी बड़े हादसे की संभावना बनी हुई है, जिससे ग्रामीणों की सुरक्षा खतरे में है।
- अधिकारियों ने अब मामले पर ध्यान दिया है और जल्द समाधान का आश्वासन दिया है।
सुरक्षा और विकास की जरूरत: प्रशासन को चाहिए कि वह रानीपुरा और ऐसे अन्य गांवों में बुनियादी सुविधाओं का जल्द से जल्द प्रबंध करे ताकि ग्रामीणों को जान जोखिम में डालकर जीवन न जीना पड़े।
यह घटना प्रशासनिक दावों पर सवाल खड़े करती है, जहां विकास की योजनाएं कागजों तक सीमित हैं। ग्रामीणों का कहना है कि "सूत्रों के अनुसार" प्रशासन की अनदेखी के चलते उनकी मांगें अनसुनी रह गईं। अब यह देखना होगा कि अधिकारी कब तक इस समस्या का स्थायी समाधान निकालते हैं। जब तक ऐसा नहीं होता, ग्रामीण इसी खतरनाक जुगाड़ के सहारे अपनी जिंदगी गुजारने को मजबूर हैं।
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