आमला। जिले के सिविल अस्पताल आमला में हाल ही में हुई आउटसोर्सिंग भर्तियों को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। जनसुनवाई के दौरान किसान संघर्ष समिति ने अस्पताल की कार्यप्रणाली और वित्तीय अनियमितताओं का मुद्दा उठाते हुए कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

किसान संघर्ष समिति तहसील आमला के अध्यक्ष दिनेश यदुवंशी ने आरोप लगाया कि अस्पताल में 43 पदों पर की गई आउटसोर्सिंग भर्ती में नियमों की अनदेखी की गई। ज्ञापन के अनुसार योग्य और अनुभवी अभ्यर्थियों को नजरअंदाज कर अपात्र व्यक्तियों का चयन किया गया, जिससे स्थानीय शिक्षित युवाओं में नाराजगी है। समिति का दावा है कि विश्वसनीय सूत्रों और स्थानीय शिकायतों के आधार पर भर्ती प्रक्रिया में आर्थिक लेनदेन और रिश्वतखोरी के जरिए चयन प्रभावित किया गया।

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि जिस कंपनी को आउटसोर्सिंग का ठेका दिया गया, उसकी चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई। निविदा प्रक्रिया के पालन को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। समिति ने मांग की है कि टेंडर दस्तावेजों की सूक्ष्म जांच कराई जाए और पूरी प्रक्रिया को सार्वजनिक किया जाए।

इसके अलावा रोगी कल्याण समिति की राशि के उपयोग पर भी सवाल खड़े किए गए हैं। पिछले पांच वर्षों में समिति के माध्यम से खरीदी गई सामग्रियों की गुणवत्ता और बाजार मूल्य में अंतर होने की बात कही गई है। आय-व्यय विवरण में स्पष्टता नहीं होने पर संभावित गड़बड़ी की आशंका जताई गई है।

दिनेश यदुवंशी ने कलेक्टर से मांग की है कि 43 पदों की भर्ती प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई जाए, आउटसोर्सिंग कंपनी के चयन की जांच हो, रोगी कल्याण समिति का पांच वर्षों का ऑडिट कराया जाए और खरीदी गई सामग्रियों का भौतिक सत्यापन किया जाए। साथ ही दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों एवं संबंधित एजेंसी के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग भी की गई है।