आमला/नई दिल्ली। आमला ब्लॉक के ग्रामीणों ने क्षेत्र में प्रस्तावित जिंक एवं बेस मेटल खदानों के खिलाफ जोरदार विरोध दर्ज कराया है। इसी क्रम में सोमवार को भारत आदिवासी पार्टी के जिला अध्यक्ष अनिल उइके के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली में बांसवाड़ा (राजस्थान) लोकसभा क्षेत्र के सांसद राजकुमार रोत से सौजन्य मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा।

*इन क्षेत्रों में प्रस्तावित है खनन*

ग्रामीणों द्वारा सौंपे गए आवेदन में बताया गया कि आमला ब्लॉक के कई गांवों में बड़े पैमाने पर खनन प्रस्तावित है, जिनमें प्रमुख रूप से—

बिसखान, खारी एवं बलढाना में लगभग 89.700 हेक्टेयर

बांसखापा एवं घाटावाड़ी कला में लगभग 55.600 हेक्टेयर

केलहापुर, डेहरी, बड़गांव एवं कुजबा में लगभग 57.300 हेक्टेयर

डेहरी में 12.567 हेक्टेयर क्षेत्र

मोआरिया एवं गजाढाना में लगभग 57 हेक्टेयर क्षेत्र

में जिंक एवं अन्य बेस मेटल खनन की संभावना जताई गई है।

*ग्रामीणों ने जताई गंभीर चिंताएं*

ज्ञापन में ग्रामीणों ने आशंका व्यक्त की कि खनन शुरू होने से—

जल स्रोतों का प्रदूषण और जल संकट बढ़ेगा

वन एवं पर्यावरण को भारी नुकसान होगा

कृषि भूमि नष्ट हो जाएगी

ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ेगा

स्थानीय जनजातीय संस्कृति और जीवनशैली पर संकट उत्पन्न होगा

*सांसद से की गई ये प्रमुख मांगें*

ग्रामीणों ने सांसद से मांग की कि—

प्रस्तावित खदानों की स्वीकृति पर तत्काल रोक लगाई जाए

स्थानीय लोगों की सहमति के बिना कोई निर्णय न लिया जाए

निष्पक्ष पर्यावरण एवं सामाजिक प्रभाव का मूल्यांकन कराया जाए

जनसुनवाई आयोजित कर ग्रामीणों की आपत्तियों को सुना जाए

*“क्षेत्र के हितों की रक्षा जरूरी”*

ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि वे अपने जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए एकजुट हैं और किसी भी ऐसी परियोजना का विरोध करेंगे जिससे उनके जीवन और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़े।

आमला क्षेत्र में प्रस्तावित खनन परियोजनाओं को लेकर अब विरोध तेज होता नजर आ रहा है। आने वाले समय में प्रशासन और सरकार के निर्णय पर ग्रामीणों की नजरें टिकी हुई हैं।