बैतूल (मध्य प्रदेश)। भीषण गर्मी के दस्तक देते ही जिले में जल संकट की आहट सुनाई देने लगी है। आम जनता को बूंद-बूंद पानी के लिए परेशान न होना पड़े, इसे सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहा है। इसी क्रम में, एसडीएम बैतूल डॉ. अभिजीत सिंह ने गुरुवार को एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की, जिसमें उन्होंने पेयजल आपूर्ति की वर्तमान स्थिति का बारीकी से जायजा लिया। बैठक के दौरान एसडीएम ने सख्त लहजे में अधिकारियों को हिदायत दी कि पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा में किसी भी तरह की कोताही या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

खराब हैंडपंप और नल-जल योजनाओं पर सीधा प्रहार

बैठक के दौरान एसडीएम डॉ. अभिजीत सिंह ने जिले के विभिन्न क्षेत्रों, विशेषकर ग्रामीण अंचलों में पानी की उपलब्धता की गहन समीक्षा की। उन्होंने पाया कि कई स्थानों पर हैंडपंप खराब होने या नल-जल योजनाओं में तकनीकी खराबी के कारण जलापूर्ति बाधित हो रही है। इस पर कड़ा संज्ञान लेते हुए उन्होंने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) और संबंधित जनपद के अधिकारियों को निर्देशित किया कि जिले के सभी खराब हैंडपंपों को युद्ध स्तर पर अभियान चलाकर तत्काल दुरुस्त किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि मशीनों की खराबी के कारण जनता को प्यासा रखना प्रशासनिक विफलता मानी जाएगी।

ग्रामीण क्षेत्रों पर विशेष नजर और 'क्विक रिस्पांस' के निर्देश

एसडीएम ने अधिकारियों को विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि सुदूर अंचलों में पानी की समस्या अक्सर देर से प्रशासन के संज्ञान में आती है, जिससे स्थिति विकराल हो जाती है। अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि जैसे ही किसी क्षेत्र से पानी की किल्लत की शिकायत मिले, संबंधित इंजीनियर या जिम्मेदार अधिकारी तत्काल मौके पर पहुँचें और वहीं समस्या का समाधान सुनिश्चित करें।

डॉ. सिंह ने कहा कि शिकायतों का निराकरण केवल कागजों पर नहीं, बल्कि धरातल पर होना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से नियमित मॉनिटरिंग करने को कहा ताकि आम नागरिकों को पानी के लिए लंबी दूरी तय न करनी पड़े।

गर्मी को लेकर वैकल्पिक व्यवस्था और 'प्लान-बी' तैयार

आगामी महीनों में बढ़ने वाली तपिश को देखते हुए एसडीएम ने 'वैकल्पिक व्यवस्था' तैयार रखने पर जोर दिया है। उन्होंने पीएचई के अधिकारियों से कहा कि यदि किसी क्षेत्र में जल स्तर गिरने से स्रोत सूख जाते हैं, तो वहां टैंकरों के माध्यम से या अन्य वैकल्पिक जल स्रोतों का उपयोग कर आपूर्ति बहाल रखी जाए। किसी भी स्थिति में पेयजल आपूर्ति बाधित नहीं होनी चाहिए, इसके लिए विभाग को अतिरिक्त संसाधनों और टीम को अलर्ट मोड पर रखने के निर्देश दिए गए हैं।

विभागीय समन्वय और उपस्थिति

इस समीक्षा बैठक में पेयजल आपूर्ति से जुड़े सभी प्रमुख विभागों का समन्वय देखने को मिला। बैठक में जनपद बैतूल एवं चिचोली के सहायक यंत्री (AE), उपयंत्री (Sub-Engineer) सहित लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। एसडीएम ने सभी अधिकारियों को आपस में तालमेल बिठाकर काम करने को कहा ताकि तकनीकी अड़चनों के कारण काम न रुकें।

निष्कर्ष: प्रशासन की प्राथमिकता में 'अंतिम छोर का व्यक्ति'

बैतूल प्रशासन का यह कदम यह स्पष्ट करता है कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के पालन में जिला प्रशासन 'अंतिम छोर के व्यक्ति' तक सरकारी सुविधाओं की पहुँच सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। डॉ. अभिजीत सिंह की यह सख्ती गर्मी के मौसम में बैतूल और चिचोली क्षेत्र के नागरिकों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है। अब जिम्मेदारी मैदानी अधिकारियों की है कि वे इन निर्देशों का अक्षरशः पालन करें और जिले को जल संकट से मुक्त रखें।


प्रमुख बिंदु (Key Highlights):

  • अध्यक्षता: एसडीएम बैतूल डॉ. अभिजीत सिंह।

  • मुख्य निर्देश: खराब हैंडपंप और नल-जल योजनाओं को तत्काल सुधारें।

  • शिकायत निवारण: मौके पर पहुँचकर तुरंत समाधान के निर्देश।

  • क्षेत्र: विशेष रूप से ग्रामीण बैतूल और चिचोली पर ध्यान।

  • रणनीति: गर्मी के लिए वैकल्पिक जल आपूर्ति की तैयारी।

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    Department Of Public Relations,M.P.