आगामी खरीफ सत्र की तैयारियों को लेकर बालाघाट जिले में कृषि विभाग ने कमर कस ली है। इसी कड़ी में 30 मई को जिला पंचायत कार्यालय, बालाघाट में उप संचालक कृषि श्री फूलसिंह मालवीय द्वारा कृषि विभाग के मैदानी अधिकारियों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य खरीफ सीजन की तैयारियों, पराली प्रबंधन, गुणवत्तापूर्ण बीज वितरण और फसल विविधीकरण (Crop Diversification) जैसी योजनाओं को प्रभावी रूप से धरातल पर उतारना था। कलेक्टर बालाघाट के निर्देशों के अनुरूप आयोजित इस समीक्षा बैठक में कृषि विकास की नई दिशाएं तय की गईं।

पराली प्रबंधन और पर्यावरण सुरक्षा

उप संचालक कृषि श्री मालवीय ने बैठक में पराली प्रबंधन को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि कृषि अवशेषों को खेतों में जलाने से न केवल मिट्टी की उर्वरता कम होती है, बल्कि वायु प्रदूषण भी फैलता है। इसके लिए उन्होंने निम्नलिखित दिशा-निर्देश दिए:

  • एसएमएस मशीन की अनिवार्यता: जिले में कार्यरत सभी हार्वेस्टर मशीनों में स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम (SMS) का अनिवार्य रूप से उपयोग सुनिश्चित किया जाए।

  • वैज्ञानिक प्रबंधन: पराली के बंडल या गांठ (Bales) बनाने की गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाए ताकि इनका व्यावसायिक उपयोग संभव हो सके।

  • प्रभावशाली नियंत्रण: खेतों में पराली जलाने की घटनाओं पर पूर्णतः अंकुश लगाने के लिए मैदानी अमले को निरंतर निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।

गुणवत्तापूर्ण बीजों की उपलब्धता

खरीफ सीजन में किसानों को बीज के लिए भटकना न पड़े, इसके लिए विभाग ने पुख्ता तैयारी की है। श्री मालवीय ने निर्देश दिए कि:

  • बीज भंडारों से लेकर ग्राम स्तर तक बीजों की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।

  • ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी अपने-अपने मुख्यालयों में बीज उपलब्धता की स्थिति पर बारीकी से नजर रखें।

  • किसानों को बीज की उपलब्धता, बीजों की किस्मों और उनके निर्धारित दरों की जानकारी समय रहते उपलब्ध कराई जाए ताकि वे अपनी बुआई की योजना सही ढंग से बना सकें।

मौसम पूर्वानुमान और फसल विविधीकरण

भारतीय मौसम विभाग द्वारा जारी किए गए हालिया पूर्वानुमान के अनुसार, मध्य प्रदेश के मध्य क्षेत्र में सामान्य से कम वर्षा होने की संभावना व्यक्त की गई है। इस चुनौतीपूर्ण स्थिति से निपटने के लिए कृषि विभाग ने एक वैकल्पिक रणनीति तैयार की है:

  • कम पानी वाली फसलों पर जोर: किसानों को धान के स्थान पर तिल, रामतिल, कोदो, कुटकी और अन्य मोटे अनाजों की खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

  • धान का उत्पादन: जिन क्षेत्रों में जलभराव की प्राकृतिक स्थिति रहती है, वहां धान की खेती की सलाह दी गई है।

  • डीएसआर तकनीक: धान के उत्पादन के लिए 'डायरेक्ट सीडेड राइस' (DSR) पद्धति, यानी सीधी बुआई को बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए हैं, जो पानी बचाने में सहायक होती है।

एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फण्ड (AIF) का लाभ

बैठक में सरकार की प्रमुख योजना 'एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फण्ड' (AIF) की गहन समीक्षा की गई। इस योजना के बारे में जानकारी देते हुए अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि वे अधिक से अधिक किसानों और युवाओं को इससे जोड़ें:

  • ब्याज अनुदान: इस योजना के तहत कृषि आधारित गतिविधियों और उद्योगों की स्थापना के लिए ऋण लेने पर 3 प्रतिशत ब्याज अनुदान का प्रावधान है।

  • उद्देश्य: इसका मुख्य उद्देश्य कृषि प्रसंस्करण, भंडारण और मूल्य संवर्धन (Value Addition) को बढ़ावा देना है।

  • लक्ष्य निर्धारण: विभाग ने मैदानी अधिकारियों के लिए इस योजना को लोकप्रिय बनाने और हितग्राहियों को ऋण दिलाने के लिए स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किए हैं।

निष्कर्ष और विभागीय संकल्प

बैठक के समापन पर उप संचालक कृषि श्री फूलसिंह मालवीय ने विभागीय अमले का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि खरीफ सत्र की सफलता पूरी तरह से हमारी जमीनी तैयारियों पर निर्भर है। उन्होंने जोर दिया कि अधिकारियों को गांव-गांव जाकर किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, जल संरक्षण आधारित खेती और बदलते मौसम के अनुकूल फसल चयन के प्रति जागरूक करना होगा। विभागीय स्तर पर किए जा रहे ये प्रयास न केवल किसानों की आय में वृद्धि करेंगे, बल्कि जिले में कृषि उत्पादन को भी नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे। बालाघाट कृषि विभाग का यह समन्वित प्रयास जिले के किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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